Penn Calendar Penn A-Z School of Arts and Sciences University of Pennsylvania

समाज और संस्कृति

भारत का नागरिक ड्रोन उद्योगः ड्रोन विनियमन के लिए सिविल सोसायटी की व्यापक भूमिका आवश्यक

Author Image
03/12/2018
शशांक श्रीनिवासन
7 अक्तूबर, 2014 को लगता है कि मानवरहित हवाई वाहन (अर्थात् UAVs; जिसे आम भाषा में ड्रोन कहा जाता है) के निर्माण और संचालन के क्षेत्र में भारत के विश्व-नेता बनने की आकांक्षाओं पर रातों-रात तुषारापात हो गया. भारत में नागरिक उड्डयन के विनियामक महानिदेशक, नागरिक उड्डयन (DGCA) ने एक संक्षिप्त सार्वजनिक सूचना जारी करके हर प्रकार की गैर-सरकारी संस्था या व्यक्ति को किसी भी प्रयोजन के लिए संरक्षा और सुरक्षा के कारणों से UAVs अर्थात् ड्रोन को उड़ाने पर

अनजान बने रहने में ही आनंद हैः भारत में असमानता का सच

Author Image
08/10/2018
संजय चक्रवर्ती
बार-बार होने वाले धमाकों की तरह मीडिया और ट्विटर खाताधारकों के बीच छोटा-मोटा वाक् युद्ध ही छिड़ गया है कि भारत में कितनी असमानता है और यह किस हद तक बढ़ती जा रही है. इस बार इस बहस की शुरुआत हुई जेम्स क्रैबट्री की पुस्तक द बिलियनर राज के प्रकाशन से. पिछले साल भी इसी तरह की घटना हुई थी जब ल्यूक चांसेल और थॉमस पिकेटी का एक आलेख “भारतीय आय में असमानता, 1922-2015 : ब्रिटिश राज से बिलियनर राज तक ?” प्रकाशित हुआ था. दोनों ही इस बात पर सहमत थे कि भारत में

अवरोधों और देशीय मूल्यों के अंतराल पर

Author Image
30/07/2018
शौमित्रो चटर्जी
भारत के किसानों से बहुत ही कम राजस्व की वसूली होती है. राजस्व की कमी का एक कारण तो यह है कि उनकी उपज ही नहीं होती और /या उन्हें अपनी उपज का बहुत कम दाम मिलता है. जहाँ एक ओर उत्पादकता का संबंध अधिकांशतः कृषि के तकनीकी पक्षों से होता है, वहीं मूल्य का निर्धारण कृषि की अर्थव्यवस्था के हालात पर निर्भर करता है और इसका निदान आर्थिक नीति में बदलाव लाकर ही किया जा सकता है. इस लेख में मैं मूल्य के दो आयामों पर चर्चा करना चाहूँगा

अमेरिका में भारत का अध्ययन

Author Image
29/06/2018
देवेश कपूर
भारत की स्वाधीनता से पहले अमेरिका में भारत का जितना अध्ययन होता था, उसके मुकाबले अब यह अध्ययन कुछ कम हो गया है. सन् 1939 में महान् संस्कृतविद डब्ल्यू नॉर्मन ब्राउन ने विचार व्यक्त किये थे कि “किसी दैविक वरदान के बिना भी यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि [बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में] सशक्त भारत, संभवतः स्वाधीन होकर विश्व की बिरादरी में शामिल हो जाएगा और संभवतः एक प्रमुख और महत्वपूर्ण प्राच्यदेश होगा. और निश्चय ही बौद्धिक रूप में संपन्न और उत्पादक

भारत के बाहर भारतीय महिलाओं का चित्रण (निरूपण)

Author Image
18/06/2018
रविंदर कौर

भारतीयइतिहासकारों ने भारत में भारतीय महिलाओं और लैंगिक संबंधों की साम्राज्यवादी व्याख्याओं में निहित दृष्टि को विश्लेषित करने के लिए बहुत मेहनत की है. कन्याओं की भ्रूण हत्याओं की बात यदि छोड़ भी दी जाए तो भी ब्रिटिश इतिहासकारों ने पर्दा प्रथा,सती-प्रथा, बाल-विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों का उल्लेख करते हुए भारतीय महिलाओं को “नीचे पायदान”पर रखने का प्रयास किया है.

पूरे भारत में बिजली की कमी का संकट

Author Image
12/03/2018
ऐलिज़ाबेथ चटर्जी
क्या कारण है कि कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की तुलना में बिजली अधिक जाती है ? हाल ही में भारत ने यद्यपि पीढ़ीगत क्षमता और ग्रामीण विद्युतीकरण के क्षेत्र में बहुत-सी उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन पर्याप्त भुगतान और निवेश न हो पाने और निराशाजनक प्रदर्शन के दुश्चक्र में फँस जाने के कारण कई सुविधाओं का लाभ लोगों तक अभी भी नहीं पहुँच पा रहा है. इसके भारी दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं: सन् 2010 में विश्व बैंक की अनुमानित लागत के अनुसार बिजली की कमी की लागत भारत

भारत-अफ्रीका संबंधों का बदलता परिदृश्य

Author Image
26/02/2018
वेदा वैद्यनाथन
पिछले कुछ दशकों में भारत की अफ्रीका नीति बहुत हद तक निराशा और अनिच्छा से प्रकट की गई प्रतिक्रियाओं के बीच झूलती रही है. कई मंचों पर तो इस महाद्वीप की ओर रणनीतिक उदासीनता भी दिखाई पड़ी है. नई दिल्ली की विदेश नीति के व्यापक ढाँचे में अफ्रीका महाद्वीप के देशों को अब तक कोई खास महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन अब स्थिति में बदलाव आने लगा है. भारत के नेता अफ्रीकी देशों की यात्रा भी बहुत कम करते थे और बहुत कम ही ऐसा होता था कि नई दिल्ली

भारतीयों के लिए सुरक्षित आर्थिक प्रवासन सुनिश्चित करना

Author Image
12/02/2018
नम्रता राजू
ज़रा कल्पना कीजिए कि आप एक बिल्कुल नये किस्म के काम के लिए विदेश जा रहे हैं और वहाँ जाकर आपको पता चलता है कि $4,700 डॉलर में आपको किसी नियोक्ता के हाथों बेच दिया गया है. यह असंभव-सा लगता है, लेकिन भारत की 39 वर्षीय हैदराबादी महिला की यह असली कहानी है. यह वही महिला है जो पिछले साल सुर्खियों में छाई हुई थी. सलमा को धोखे से कपटी भर्ती एजेंटों द्वारा उसके नियोक्ता को बेच दिया गया था. सलमा ने जब उससे

भारत का ग्रामीण मतदाता कितना समझदार है?

Author Image
29/01/2018
मार्क शाइडर
क्या भारत के ग्रामीण मतदाता इतने समझदार हैं कि वे भारत के स्थानीय चुनावों की जटिलता को समझ सकें ? सन् 1992 में 73 वें संशोधन के पारित होने के बाद ग्रामीण पंचायत अर्थात् ग्रामीण भारत के निम्नतम शासकीय पायदान को संवैधानिक अधिकार मिल गया कि ग्राम पंचायत और सरपंच का चुनाव नियमित रूप में कराया जाए. इसका परिणाम यह हुआ कि स्थानीय शासन के लाखों चुनावी पदों का सृजन हो गया. इससे ग्रामीण नेताओं का, खास तौर पर सरपंचों का सशक्तीकरण हो गया और

क्या भारत में समावेशी विकास संभव है? कृषि क्षेत्र की चुनौती

Author Image
Author Image
Author Image
01/01/2018
संजय चक्रवर्ती, एस. चंद्रशेखर और कार्तिकेय नारपराजु

समावेशी विकास या “गरीबोन्मुखी” विकास भारत के विकास संबंधी विमर्श का एक महत्वपूर्ण विचारबिंदु बन गया है. इसे व्यापक समर्थन मिला है, क्योंकि इस विकास में दो सबसे महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं: प्रगतिवादी (या अधिक समतावादी) वितरण सहित आमदनी में वृद्धि. इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले बीसवीं सदी के आरंभ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यूपीए-1 सरकार के कार्यकाल में किया गया था. उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में एनडीए सरकार ने इसे आगे बढ़ाया, लेकिन क्या ‘समावेशी विकास’ ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे से कहीं आगे की बात है?