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विदेश नीति और सुरक्षा

भारत-प्रशांत ढाँचे को समरूप बनाने को उन्मुख भारत के साथ सहयोग?

पारस रत्न
2018 के IISS शांगरी-ला संवाद में, भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर अमरीका के तटों तक भौगोलिक विस्तार के रूप में भारत-प्रशांत क्षेत्र से जुड़ी भारत की अवधारणा को स्पष्ट किया था. यहां गौर करने वाली बात है की भारत ने अमरीका के कहने पर भारत-प्रशांत क्षेत्र को नहीं अपनाया; बल्कि इसका जिक्र इतिहासकार कालिदास नाग के लेखों में मिलता है , जिन्होंने चालीस के दशक में अपने लेखों (भारत-प्रशांत विश्व) में इस

अंतरिक्ष युद्ध और प्रदूषण पर मिशन शक्ति का प्रभाव

निवेदिता राजू
रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च,2019 का अपना संबोधन इस घोषणा के साथ आरंभ किया था कि “भारत अब वैश्विक महाशक्ति बन गया है.” उनका यह बयान इस धारणा पर आधारित था कि उपग्रह-विरोधी हथियारों का यह परीक्षण (ASAT) अंतरिक्ष किराये पर लेने वाले एक राष्ट्र के रूप में भारत की स्थिति को स्थापित करने के लिए यह “अनिवार्य” था, लेकिन किफ़ायती दरों पर नवोन्मेषकारी टैक्नोलॉजी के निर्माण की अनूठी क्षमता के कारण भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई दशकों

भारत एक महाशक्ति हैः क्षमता बनाम वास्तविकता

क्रिस ऑगडेन
हाल ही के दशकों में भारत धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय सोपान पर ऊपर चढ़ता जा रहा है और इसके कारण विश्व की एक प्रमुख महाशक्ति के रूप में इसका वैश्विक प्रभाव भी नज़र आने लगा है. पिछले चार दशकों में चीन एक जबर्दस्त ताकत के रूप में उभरकर सामने आया है और इसके साथ-साथ भारत ने भी काफ़ी ऊँचाइयाँ हासिल कर ली हैं. इसके कारण विश्व की आर्थिक शक्ति का केंद्र यूरोप और उत्तर अमरीका से हटकर एशिया की ओर स्थानांतरित होने लगा है. साथ ही साथ एशिया की इन दोनों

दक्षिण एशिया में देखभाल की बढ़ती अर्थव्यवस्था

फ्रांसिस कुरियाकोज़ और दीपा ऐय्यर
सन् 2018 में “शानदार काम के भविष्य के लिए देखभाल के काम और उससे जुड़े रोज़गार” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद देखभाल के कामों पर नीति-विषयक बहस छिड़ गई. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पाया कि देखभाल के कामों में बहुत से ऐसे कौशल भी शामिल हैं, जिन्हें न तो

मोदी के दूसरे कार्यकाल में जापान-भारत संबंध

रूपकज्योति बोरा
ओसाका में G20 शिखर वार्ता के आयोजन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार जापान के प्रधानमंत्री आबे से विचार-विमर्श करने का अवसर मिला है. इस वर्ष के आरंभ में हुए आम चुनाव में निर्णायक बहुमत से जीतकर सत्ता पर एक बार फिर काबिज होने के बाद मोदी को और उनकी सरकार को विदेशी मामलों में अधिक लचीलेपन से आगे बढ़ने का अवसर मिला है. इसके अलावा, डॉ. एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाकर उन्होंने यह स्पष्ट संकेत भी दे दिया है कि

अमेरिका का प्रस्थान, भारत का प्रवेश? अफ़गानिस्तान में शांति-प्रक्रिया शुरू

चयनिका सक्सेना
पिछले अठारह वर्षों में अफ़गानिस्तान की स्थिति उतनी ही अस्थिर रही है जितनी तीन दशक पहले थी. सन् 2017 में जब चरमपंथियों को रोकने के लिए नंगरहार में तथाकथित "मदर-ऑफ़-ऑल-बम" गिराया गया था, तब से लेकर अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. या फिर सन् 2001 में जब 25 हितधारकों ने मिलकर “अफ़गानी लोगों के देश में भयानक संघर्ष को खत्म करने और राष्ट्रीय समझौते और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करने और

भारत-रूसी रक्षा संबंध वाशिंगटन की नाराज़गी को भविष्य में भी झेलते रह सकते हैं

योगेश जोशी
मार्च, 2019 में भारत ने रूस के साथ एक और इसकी अकुला-श्रेणी की हमलावर परमाणु पनडुब्बी (SSN) को पट्टे पर लेने के लिए एक अंतर सरकारी करार (IGA) पर हस्ताक्षर किये. यह परमाणु पनडुब्बी सन् 2025 में रूस के सेवेरोद्विंस्क के आर्कटिक बंदरगाह में पतवार के एक प्रमुख परिशोधन के बाद भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगी. इससे पहले भारत ने सन् 2012 में मास्को से अकुला-श्रेणी के SSBN को

अपने पुराने पड़ोसी देशों के साथ भारत के नये कारोबारी रिश्ते

सूज़न मैथ्यू
पिछले दशक में भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ, खास तौर पर बांग्ला देश, भूटान और नेपाल के साथ क्षेत्रीय कारोबार कुछ हद तक बढ़ा लिया है. इस समय भारत का दक्षिण एशिया में $19.1 बिलियन डॉलर का वास्तविक कारोबार है. यह कारोबार उसके $637.4 बिलियन डॉलर के कुल वैश्विक कारोबार का मात्र तीन प्रतिशत है और संभावित कारोबार से $43 बिलियन डॉलर कम है. हाल ही के अनुमान के अनुसार मानव-निर्मित कारोबारी प्रतिबंधों में कमी होने से दक्षिण एशिया के कारोबार में तीन गुना वृद्धि हुई है और यह

विदेश नीति का “ हिंदुत्व चेहरा” ? भारत की 2014-19 की विदेश नीति पर प्रतिबिंब

अर्ड्न्ट माइकल
2014 के चुनावों के कुछ समय पहले, नरेंद्र मोदी विदेशी मामलों में पूरी तरह से कोरे थे. उस समय उन्होंने अपने एक इंरटरव्यू में कहा था, “ अन्य देशों के साथ विदेशी मामलों में व्यवहार करते समय मेरा हिंदुत्व का चेहरा बहुत उपयोगी सिद्ध होगा.” उनका यह बयान एक सख्त वैचारिक और मुखर विदेश नीति का संकेत हो सकता था, जिसने भारत को उसकी सभी भावी गतिविधियों में प्रथम बनाये रखा. फिर भी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की विदेश नीति के पाँच वर्षों के