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विदेश नीति और सुरक्षा

दक्षिण एशिया में देखभाल की बढ़ती अर्थव्यवस्था

फ्रांसिस कुरियाकोज़ और दीपा ऐय्यर
सन् 2018 में “शानदार काम के भविष्य के लिए देखभाल के काम और उससे जुड़े रोज़गार” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद देखभाल के कामों पर नीति-विषयक बहस छिड़ गई. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पाया कि देखभाल के कामों में बहुत से ऐसे कौशल भी शामिल हैं, जिन्हें न तो

मोदी के दूसरे कार्यकाल में जापान-भारत संबंध

रूपकज्योति बोरा
ओसाका में G20 शिखर वार्ता के आयोजन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार जापान के प्रधानमंत्री आबे से विचार-विमर्श करने का अवसर मिला है. इस वर्ष के आरंभ में हुए आम चुनाव में निर्णायक बहुमत से जीतकर सत्ता पर एक बार फिर काबिज होने के बाद मोदी को और उनकी सरकार को विदेशी मामलों में अधिक लचीलेपन से आगे बढ़ने का अवसर मिला है. इसके अलावा, डॉ. एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाकर उन्होंने यह स्पष्ट संकेत भी दे दिया है कि

अमेरिका का प्रस्थान, भारत का प्रवेश? अफ़गानिस्तान में शांति-प्रक्रिया शुरू

चयनिका सक्सेना
पिछले अठारह वर्षों में अफ़गानिस्तान की स्थिति उतनी ही अस्थिर रही है जितनी तीन दशक पहले थी. सन् 2017 में जब चरमपंथियों को रोकने के लिए नंगरहार में तथाकथित "मदर-ऑफ़-ऑल-बम" गिराया गया था, तब से लेकर अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. या फिर सन् 2001 में जब 25 हितधारकों ने मिलकर “अफ़गानी लोगों के देश में भयानक संघर्ष को खत्म करने और राष्ट्रीय समझौते और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करने और

भारत-रूसी रक्षा संबंध वाशिंगटन की नाराज़गी को भविष्य में भी झेलते रह सकते हैं

योगेश जोशी
मार्च, 2019 में भारत ने रूस के साथ एक और इसकी अकुला-श्रेणी की हमलावर परमाणु पनडुब्बी (SSN) को पट्टे पर लेने के लिए एक अंतर सरकारी करार (IGA) पर हस्ताक्षर किये. यह परमाणु पनडुब्बी सन् 2025 में रूस के सेवेरोद्विंस्क के आर्कटिक बंदरगाह में पतवार के एक प्रमुख परिशोधन के बाद भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगी. इससे पहले भारत ने सन् 2012 में मास्को से अकुला-श्रेणी के SSBN को

अपने पुराने पड़ोसी देशों के साथ भारत के नये कारोबारी रिश्ते

सूज़न मैथ्यू
पिछले दशक में भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ, खास तौर पर बांग्ला देश, भूटान और नेपाल के साथ क्षेत्रीय कारोबार कुछ हद तक बढ़ा लिया है. इस समय भारत का दक्षिण एशिया में $19.1 बिलियन डॉलर का वास्तविक कारोबार है. यह कारोबार उसके $637.4 बिलियन डॉलर के कुल वैश्विक कारोबार का मात्र तीन प्रतिशत है और संभावित कारोबार से $43 बिलियन डॉलर कम है. हाल ही के अनुमान के अनुसार मानव-निर्मित कारोबारी प्रतिबंधों में कमी होने से दक्षिण एशिया के कारोबार में तीन गुना वृद्धि हुई है और यह

विदेश नीति का “ हिंदुत्व चेहरा” ? भारत की 2014-19 की विदेश नीति पर प्रतिबिंब

अर्ड्न्ट माइकल
2014 के चुनावों के कुछ समय पहले, नरेंद्र मोदी विदेशी मामलों में पूरी तरह से कोरे थे. उस समय उन्होंने अपने एक इंरटरव्यू में कहा था, “ अन्य देशों के साथ विदेशी मामलों में व्यवहार करते समय मेरा हिंदुत्व का चेहरा बहुत उपयोगी सिद्ध होगा.” उनका यह बयान एक सख्त वैचारिक और मुखर विदेश नीति का संकेत हो सकता था, जिसने भारत को उसकी सभी भावी गतिविधियों में प्रथम बनाये रखा. फिर भी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की विदेश नीति के पाँच वर्षों के

मुझे फ़ोन करें, हो भी सकता है? अमरीका की तालिबान हॉटलाइन और भारत की अफ़गानिस्तान में वापसी

चयनिका सक्सेना
अफ़गानिस्तान के संघर्ष को समाप्त करने के प्रयोजन से तालिबान के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए नियुक्त अमरीका के विशेष प्रतिनिधि ज़ल्मय खलीलज़ाद द्वारा की गई पहल अनेक प्रकार की पहलों में से एक महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि उन्होंने तालिबान को अमरीका के साथ संपर्क साधने के लिए सीधी हॉटलाइन दे दी है. असल में बात यह है कि अमरीका ने तालिबान को जो सुविधा अब प्रदान की है, वह सुविधा उसने तालिबान को

एशिया में उभरते रणनीतिक समीकरण

पारस रत्न
28-29 अक्तूबर, 2018 को 13 वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के एक भाग के रूप में जापान की यात्रा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व की निरंतर बदलती अस्थिर व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में भारत-जापान के द्विपक्षीय संबंधों के उदीयमान विकास बिंदुओं पर प्रकाश डाला था. भारत और जापान दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. इसलिए दोनों ही देशों के बीच विभिन्न मोर्चों पर सहयोग निश्चय ही अपेक्षित है.यह भी उल्लेखनीय है कि एक दूसरे के साथ बेहतर और मज़बूत संबंध बनाने के सामूहिक हितों का अंदाज़ा इसी बात से हो

भारत की अफ़गानिस्तान नीति के पुनर्निर्धारण का समय

अविनाश पालीवाल
मार्च 2018 में आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा था कि "इस तथ्य के बावजूद कि सशस्त्र समूहों ने खुद की अपनी पहचान बना ली है और हम सभी के सामने यह सिद्ध भी कर दिया है कि वे समझौते के कट्टर विरोधी हैं, फिर भी अफ़गान सरकार की शांति स्थापित करने की इच्छा अभी भी बनी हुई है." सन् 2015 में इसी तरह से आगे बढ़कर घानी ने जो पहल की थी, उसे न केवल नापसंद किया गया था, बल्कि इसे घानी का पाकिस्तान के प्रति झुकाव भी माना

अफ्रीका में एशियाई अड्डा: सेशल्स में भारत को और भी गहरा झटका लग सकता था

नीलंती समरनायके
पिछले माह भारत के राजकीय दौरे के समय सैशल्स के राष्ट्रपति डैनी फ़ॉरे का भव्य स्वागत किया गया था. हिंद महासागर के अपने छोटे-से द्वीप के लिए वह अपने साथ रक्षा सामग्री के रूप में बहुत बड़ी सौगात लेकर गए थेः सेकंड डोर्नियर एयरक्राफ़्ट, सागर सुरक्षा सहयोग के लिए $100 मिलियन डॉलर का लाइन ऑफ़ क्रेडिट और व्हाइट शिपिंग की सूचना साझा करने के लिए एक करार. परंतु दोनों देशों के साझा हितों से संबंधित