Penn Calendar Penn A-Z School of Arts and Sciences University of Pennsylvania
रोहित चंद्र
25/02/2019
पिछले पाँच वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में कोयला उद्योग से वित्तीय पूँजी की वापसी को लेकर धीरे-धीरे आम सहमति बनने लगी है. विशाल और स्वायत्त समृद्धि निधि और पेंशन निधि एवं विश्व बैंक जैसी बहुराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने कोयले के वित्तपोषण से बाहर निकलने की घोषणा करते हुए इसका संकेत दे दिया है. बढ़ती विनियामक लागत के कारण जहाँ एक ओर पश्चिम के कोयला-आधारित उत्पादकों ने पहले ही अपने पैर समेट लिये हैं, वहीं एशिया के, खास तौर पर भारत और चीन के उत्पादकों ने कोयला क्षेत्र के
,
रिखिल आर. भावनानी & बेथानी लेसिना
11/02/2019
पश्चिम में ब्रैक्सिट और अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प और हंगरी के विक्टर ऑर्बन जैसे दक्षिणपंथी लोकप्रिय नेताओं के उदय का मुख्य कारण वैश्वीकरण को माना जाता है. खास तौर पर बहुत-से लोग तो यह तर्क भी देते हैं कि विशेष प्रकार के वैश्वीकरण से उत्पन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन पर लगाम न लगने के कारण ही “भूमिपुत्र
रशेल ब्रूले
28/01/2019
महिलाओं में राजनीतिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए विश्व भर में सबसे अधिक क्रांतिकारी कदम है, सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए कोटा निर्धारित करना. विशेषकर आर्थिक क्षेत्रों में कोटे का साक्ष्य और प्रतियोगिता दोनों का ही स्रोत भारत में मिलता है. भूमि के उत्तरदायित्व के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तीकरण का लाभ अंततः उन्हें कितना मिला? पिछले दो दशकों में विश्व भर में विधायिका और राजनीतिक दलों में महिला सांसदों का औसत
मार्शल एम. बाउटन
14/01/2019
मार्च, 2016 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की कृषि-नीति में ऐतिहासिक परिवर्तन लाने की घोषणा की थीः इस घोषणा के अनुसार भारत की कृषि-नीति का मुख्य लक्ष्य 2022 तक अनाज का उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आमदनी दुगुनी करना था. अनेक विशेषज्ञों ने इस घोषणा की यह कहते हुए आलोचना की थी कि इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता, फिर भी प्राथमिकताओं में परिवर्तन लाने की घोषणा का उन्होंने स्वागत किया. कई दशक पुरानी नीति में परिवर्तन लाने के पीछे मोदी की
पारस रत्न
31/12/2018
28-29 अक्तूबर, 2018 को 13 वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के एक भाग के रूप में जापान की यात्रा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व की निरंतर बदलती अस्थिर व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में भारत-जापान के द्विपक्षीय संबंधों के उदीयमान विकास बिंदुओं पर प्रकाश डाला था. भारत और जापान दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. इसलिए दोनों ही देशों के बीच विभिन्न मोर्चों पर सहयोग निश्चय ही अपेक्षित है.यह भी उल्लेखनीय है कि एक दूसरे के साथ बेहतर और मज़बूत संबंध बनाने के सामूहिक हितों का अंदाज़ा इसी बात से हो
ऐमरिक डेवीज़
17/12/2018
पिछले तीस वर्षों में भारत सरकार ने अपने नागरिकों को शिक्षा देने का उल्लेखनीय कार्य किया है. इसकी शुरुआत राज्य-स्तर पर की गई थी. इस दिशा में सन् 1984 में शुरू किया गया आंध्र प्रदेश का प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम और सन् 1987 में राजस्थान में शुरु किया गया शिक्षाकर्मी कार्यक्रम उल्लेखनीय था. इसकी परिणति सन् 2009 में केंद्र द्वारा लागू किये गये शिक्षा-अधिकार अधिनियम के रूप में हुई. शिक्षा को समर्पित यह कानून-सम्मत चरणबद्ध कार्यक्रम अद्भुत था. इसके कारण शिक्षा का सचमुच विस्तार हुआ और प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की
शशांक श्रीनिवासन
03/12/2018
7 अक्तूबर, 2014 को लगता है कि मानवरहित हवाई वाहन (अर्थात् UAVs; जिसे आम भाषा में ड्रोन कहा जाता है) के निर्माण और संचालन के क्षेत्र में भारत के विश्व-नेता बनने की आकांक्षाओं पर रातों-रात तुषारापात हो गया. भारत में नागरिक उड्डयन के विनियामक महानिदेशक, नागरिक उड्डयन (DGCA) ने एक संक्षिप्त सार्वजनिक सूचना जारी करके हर प्रकार की गैर-सरकारी संस्था या व्यक्ति को किसी भी प्रयोजन के लिए संरक्षा और सुरक्षा के कारणों से UAVs अर्थात् ड्रोन को उड़ाने पर
अविनाश पालीवाल
19/11/2018
मार्च 2018 में आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा था कि "इस तथ्य के बावजूद कि सशस्त्र समूहों ने खुद की अपनी पहचान बना ली है और हम सभी के सामने यह सिद्ध भी कर दिया है कि वे समझौते के कट्टर विरोधी हैं, फिर भी अफ़गान सरकार की शांति स्थापित करने की इच्छा अभी भी बनी हुई है." सन् 2015 में इसी तरह से आगे बढ़कर घानी ने जो पहल की थी, उसे न केवल नापसंद किया गया था, बल्कि इसे घानी का पाकिस्तान के प्रति झुकाव भी माना
,
फ्रांसिस कुरियाकोज़ व दीपा ऐयर
05/11/2018
हम कृत्रिम बुद्धि (AI) के ऐसे युग में रहते हैं जिसने हमें प्रोसेसिंग की ज़बर्दस्त शक्ति, भंडारण की क्षमता और सूचना तक पहुँचने की शक्ति प्रदान की है. इसी प्रौद्योगिकी के बढ़ते विकास के पहले चरण में हमें चरखा, दूसरे चरण में बिजली और औद्योगिक क्रांति के तीसरे चरण में कंप्यूटर की सौगात मिली. सन् 2016 में विश्व
मीनाक्षी सिन्हा
22/10/2018

कोलकाता में पहली मैट्रो परियोजना के बाद भारत को लगभग दो दशक का समय लगा जब दूसरी मैट्रो रेल परियोजना सन् 2002 में दिल्ली में शुरू हुई. लेकिन उसके बाद भारत के विभिन्न शहरों में मैट्रो रेल परियोजनाओं की झड़ी लग गई. पिछले एक दशक में भारत के तेरह से अधिक शहरों में मैट्रो रेल प्रणालियों को मंजूरी प्रदान की गई और कई राज्य ऐसे हैं जो केंद्र सरकार से अभी-भी मैट्रो रेल परियोजनाओं की मंजूरी मिलने की बाट जोह रहे हैं.