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संक्रमण के दौर में भारत (India in Transition)

रैफ़ेल खान
14/09/2020

जून 2020 में भारत को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद (UNSC) का अस्थायी सदस्य चुना गया था. मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था का यह ऐसा महत्वपूर्ण दौर है जब बहुत से प्रेक्षक संकट के दौर से गुज़र रहे हैं. जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 केवल दो ऐसे भयानक संकट हैं जिनके कारण वैश्विक सहयोग की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है. युद्ध के बाद से अब तक वैश्विक व्यवस्था कभी भी एकपक्षीय और राष्ट्रवादी प्रवृत्तियों से घिरी नहीं रही.

बिलाल बलोच
31/08/2020

इसी ग्रीष्म ऋतु के आरंभ में इंडिया रिव्यू ने एक विशेषांक प्रकाशित किया था, जिसमें भारत की लोकतांत्रिक राजनीति के संदर्भ में 2019 के आम चुनावों के निहितार्थों पर विचार किया गया था. मिलन वैष्णव और मैंने इसके निबंधों का संपादन किया था.

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साई बालकृष्णन् एवं अरिंदम दत्त
17/08/2020

कोरोना वायरस से फैली महामारी के कारण भारत सरकार द्वारा देशव्यापी लॉकडाउन लागू करने के दो महीने के बाद भुखमरी के कगार पर खड़े लाखों मज़दूर हज़ारों किलोमीटर दूर अपने गाँवों के अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थलों की ओर पैदल निकल पड़े. जिस रेल के डिब्बे में सवार होकर वे अपने गाँवों से शहरों की ओर गए थे, उसी रेल की उन्हीं परिचित पटरियों पर चलते हुए वे अपने गाँवों की ओर लौटने लगे. 8 मई को औरंगाबाद के पास रेल की पटरी पर सोते हुए सोलह प्रवासी मज़दूरों को मालगाड़ी ने अपने पहियों से रौंद दिया.

फ़र्ज़ाना अफ्रीदी
03/08/2020

सन् 2018 में विश्व के 30 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 22 शहर भारत में ही थे. खाना बनाने और कमरे को गर्म करने जैसे व्यापक वायु प्रदूषण के घरेलू स्रोत भारत सहित अधिकांश विकासशील देशों में प्रदूषण के एकमात्र सबसे बड़े स्रोत हैं. लकड़ी और गोबर जैसे ठोस ईंधन से खाना बनाने के कारण घरों में वायु प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 40 गुना अधिक हो सकता है.

सविता शंकर
20/07/2020

कोविड-19 के संकट और उसके बाद के लॉकडाउन ने भारत में खास तौर पर सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए उनके सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं. यही कारण है कि भारत सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था में उनके महत्वपूर्ण स्थान को देखते हुए देश के 63.4 मिलियन सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों  (MSMEs) की मदद के लिए अनेक उपायों की घोषणा कर दी है. इन उद्यमों में 110 मिलियन लोग काम करते हैं और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इनका हिस्सा 29 प्रतिशत है.

प्रेरणा सिंह
08/06/2020

नये कोरोना के विषाणु जैसे रोगाणुओं का सबसे भयावह पहलू यही है कि यह देश की सीमाओं को नहीं पहचानता. इसके बावजूद ये सीमाएँ ही संक्रामक बीमारियों से लड़ने की हमारी संवेदनशीलता की सीमाएँ भी तय करती हैं. आज सरकारी प्रयासों के कारण ही न्यूज़ीलैंड और विएतनाम जैसे देशों में उनकी राष्ट्रीय सीमाओं के अंदर इनके नागरिकों को कोविड-19 से बहुत कम नुक्सान होने की आशंका है. 

अपूर्वानंद
01/06/2020

जैसे-जैसे भारत कोविड-19 के वृत्त को समतल बनाने की कोशिश में आगे बढ़ रहा है, मुस्लिम-विरोधी उन्माद बढ़ता जा रहा है. हालाँकि यह उन्माद कोई नई बात नहीं है, लेकिन महामारी के दौरान इस उन्माद में भारी वृद्धि हुई है. मुसलमानों पर शारीरिक हमले, कॉलोनियों और गाँवों में उनके प्रवेश पर रोक लगाने के साथ देश-भर में यह अपील जारी की जा रही है कि कोई भी उनके साथ किसी तरह का कारोबार न करे.