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संक्रमण के दौर में भारत (India in Transition)

संजय चक्रवर्ती
15/07/2019

हाल ही में अंग्रेज़ी में प्रकाशित पुस्तक “हमारे अपने बारे में सचः मनु से मोदी तक भारत में सूचना की राजनीति ” में मैंने यह विमर्श प्रस्तुत किया है कि पिछली दो शताब्दियों में भारत के सामाजिक “सच” कैसे गढ़े गए, उनके आकार ग्रहण करने के कारणों की व्याख्या के साथ-साथ उनके राजनीतिक और सामाजिक दुष्परिणामों को भी वर्णित किया है. अपनी उक्त पुस्तक के विमर्श की रूपरेखा के मुख्य बिंदुओं को मैं सारांश रूप में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ.

तुलसीराज रवीला
17/06/2019
सन् 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य राष्ट्रों ने स्थायी विकास के लक्ष्य (SDG) निर्धारित करते समय सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का संकल्प भी किया था. सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की प्रक्रिया को तीन तत्वों से परिभाषित किया जाता है: सभी व्यक्तियों और समुदायों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, व्यापक देखभाल और वित्तीय सुरक्षा. चूँकि पहुँच ही स्वास्थ्य सेवा का मूल आधार है लोगों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) को मुख्य रणनीति के तौर पर मान्यता प्रदान की
मार्शल एम. बाउटन
03/06/2019
भारत में हरित क्रांति के सूत्रपात के पाँच से अधिक दशक बीत गये हैं, लेकिन भूख के विरुद्ध हमारा युद्ध अभी तक समाप्त नहीं हुआ है. हमें हरित क्रांति की प्रेरणा तब मिली थी, जब साठ के दशक के मध्य में अच्छी फसल नहीं हुई थी और अकाल के हालात पैदा हो गए थे, लेकिन इसका असली उद्देश्य था, भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और अगर सटीक रूप में कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था. अब हम यह देख सकते हैं कि उस समय अपनाई गई नीतियों में अब तक कोई बड़ा
वाल्टर ऐंडर्सन
20/05/2019

भारत का सबसे अधिक प्रभावशाली गैर सरकारी संगठन (NGO) है, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS). इसका तेज़ी से विकास हुआ है और इसकी चर्चा हाल ही की मेरी पुस्तक ‘The RSS: A View to the Inside’ (सहलेखकः श्रीधर दामले) में की गई है. यह पुस्तक कुछ हद तक मेरी पिछली पुस्तक ‘The Brotherhood in Saffron’ की अगली कड़ी है, जिसमें भारत में आए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों के साथ-साथ इस पुस्तक के प्रकाशित होने के तीन दशक पहले के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) का लेखा-जोखा दिया गया है. 

सूज़न मैथ्यू
06/05/2019
पिछले दशक में भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ, खास तौर पर बांग्ला देश, भूटान और नेपाल के साथ क्षेत्रीय कारोबार कुछ हद तक बढ़ा लिया है. इस समय भारत का दक्षिण एशिया में $19.1 बिलियन डॉलर का वास्तविक कारोबार है. यह कारोबार उसके $637.4 बिलियन डॉलर के कुल वैश्विक कारोबार का मात्र तीन प्रतिशत है और संभावित कारोबार से $43 बिलियन डॉलर कम है. हाल ही के अनुमान के अनुसार मानव-निर्मित कारोबारी प्रतिबंधों में कमी होने से दक्षिण एशिया के कारोबार में तीन गुना वृद्धि हुई है और यह
अशोक गुलाटी
22/04/2019
आज भारत की आबादी 1.35 अरब हो गई है. संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2017 के जनसंख्या-अनुमान के अनुसार वर्ष 2024 तक भारत की कुल आबादी चीन की कुल आबादी से भी अधिक हो जाएगी और वर्ष 2030 तक यह आँकड़ा 1.5 अरब तक पहुँच जाएगा और भारत इस भूमंडल का सबसे अधिक आबादी वाला देश हो जाएगा. लगभग दो-तिहाई भारतीयों की आयु 35 वर्ष से कम है. पिछले दो दशकों से भारत की सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है और इसी
अर्ड्न्ट माइकल
08/04/2019
2014 के चुनावों के कुछ समय पहले, नरेंद्र मोदी विदेशी मामलों में पूरी तरह से कोरे थे. उस समय उन्होंने अपने एक इंरटरव्यू में कहा था, “ अन्य देशों के साथ विदेशी मामलों में व्यवहार करते समय मेरा हिंदुत्व का चेहरा बहुत उपयोगी सिद्ध होगा.” उनका यह बयान एक सख्त वैचारिक और मुखर विदेश नीति का संकेत हो सकता था, जिसने भारत को उसकी सभी भावी गतिविधियों में प्रथम बनाये रखा. फिर भी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की विदेश नीति के पाँच वर्षों के
दीया मित्रा
25/03/2019

1980-99 के बीच जन्मे इस सहस्राब्दी के बच्चों (Millennials) को लगातार मैं पीढ़ी (Generation Me) के रूप में वर्णित किया जाता है. उनका न तो सही तौर पर प्रतिनिधित्व होता है और न ही उन्हें सराहा जाता है और उन्हें स्टीरियोटाइप बना दिया जाता है. उन्हें अक्सर गैर-ज़िम्मेदार और आलसी किस्म के युवाओं के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन हाल ही में सहस्राब्दी की पीढ़ी (Millennials) के रूप में वर्णित इन युवाओं पर मीडिया का काफ़ी ध्यान आकर्षित हुआ है.

चयनिका सक्सेना
11/03/2019
अफ़गानिस्तान के संघर्ष को समाप्त करने के प्रयोजन से तालिबान के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए नियुक्त अमरीका के विशेष प्रतिनिधि ज़ल्मय खलीलज़ाद द्वारा की गई पहल अनेक प्रकार की पहलों में से एक महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि उन्होंने तालिबान को अमरीका के साथ संपर्क साधने के लिए सीधी हॉटलाइन दे दी है. असल में बात यह है कि अमरीका ने तालिबान को जो सुविधा अब प्रदान की है, वह सुविधा उसने तालिबान को
रोहित चंद्र
25/02/2019
पिछले पाँच वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में कोयला उद्योग से वित्तीय पूँजी की वापसी को लेकर धीरे-धीरे आम सहमति बनने लगी है. विशाल और स्वायत्त समृद्धि निधि और पेंशन निधि एवं विश्व बैंक जैसी बहुराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने कोयले के वित्तपोषण से बाहर निकलने की घोषणा करते हुए इसका संकेत दे दिया है. बढ़ती विनियामक लागत के कारण जहाँ एक ओर पश्चिम के कोयला-आधारित उत्पादकों ने पहले ही अपने पैर समेट लिये हैं, वहीं एशिया के, खास तौर पर भारत और चीन के उत्पादकों ने कोयला क्षेत्र के