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संक्रमण के दौर में भारत (India in Transition)

शकेब अयाज़
09/09/2019

सन् 1843 में भारत में जिस पुलिस-व्यवस्था का आरंभ हुआ था, वह अब भी काफ़ी हद तक ब्रिटिश काल के भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 पर ही चलती है और भारत के वर्ग, जाति, लिंग और धार्मिक विविधताओं के साथ संघर्ष में जूझ रही है. भारत में पुलिस व्यवस्था से संबंधित 2018 की रिपोर्ट के अनुसार इसके संभावित कारण प्रशिक्षण, संवेदीकरण की कमी और / या  पुलिसकर्मियों में निहित पक्षपात हो सकते हैं.

चयनिका सक्सेना
26/08/2019
पिछले अठारह वर्षों में अफ़गानिस्तान की स्थिति उतनी ही अस्थिर रही है जितनी तीन दशक पहले थी. सन् 2017 में जब चरमपंथियों को रोकने के लिए नंगरहार में तथाकथित "मदर-ऑफ़-ऑल-बम" गिराया गया था, तब से लेकर अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. या फिर सन् 2001 में जब 25 हितधारकों ने मिलकर “अफ़गानी लोगों के देश में भयानक संघर्ष को खत्म करने और राष्ट्रीय समझौते और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करने और
खुशदीप कौर मल्होत्रा
12/08/2019
20 मार्च, 2000 को अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा की पूर्व संध्या पर दक्षिण कश्मीर के चिट्टी सिंहपोरा गाँव में सशस्त्र विद्रोहियों ने पैंतीस सिख पुरुषों की नृशंसा हत्या कर दी थी. कश्मीर घाटी में कई पीढ़ियों से मुस्लिम भाइयों के साथ सद्भावना के साथ रहने वाले “सबसे कम आबादी वाले अल्पसंख्यक” सिख समुदाय के साथ यह पहली हिंसक वारदात थी. यह वारदात उस इलाके में हुई थी जो जम्मू और कश्मीर के तीन अलग-अलग क्षेत्रों में से एक था, जिन्हें उग्रवाद का बड़ा खामियाजा
संजय चक्रवर्ती
15/07/2019

हाल ही में अंग्रेज़ी में प्रकाशित पुस्तक “हमारे अपने बारे में सचः मनु से मोदी तक भारत में सूचना की राजनीति ” में मैंने यह विमर्श प्रस्तुत किया है कि पिछली दो शताब्दियों में भारत के सामाजिक “सच” कैसे गढ़े गए, उनके आकार ग्रहण करने के कारणों की व्याख्या के साथ-साथ उनके राजनीतिक और सामाजिक दुष्परिणामों को भी वर्णित किया है. अपनी उक्त पुस्तक के विमर्श की रूपरेखा के मुख्य बिंदुओं को मैं सारांश रूप में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ.

योगेश जोशी
01/07/2019
मार्च, 2019 में भारत ने रूस के साथ एक और इसकी अकुला-श्रेणी की हमलावर परमाणु पनडुब्बी (SSN) को पट्टे पर लेने के लिए एक अंतर सरकारी करार (IGA) पर हस्ताक्षर किये. यह परमाणु पनडुब्बी सन् 2025 में रूस के सेवेरोद्विंस्क के आर्कटिक बंदरगाह में पतवार के एक प्रमुख परिशोधन के बाद भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगी. इससे पहले भारत ने सन् 2012 में मास्को से अकुला-श्रेणी के SSBN को
तुलसीराज रवीला
17/06/2019
सन् 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य राष्ट्रों ने स्थायी विकास के लक्ष्य (SDG) निर्धारित करते समय सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का संकल्प भी किया था. सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की प्रक्रिया को तीन तत्वों से परिभाषित किया जाता है: सभी व्यक्तियों और समुदायों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, व्यापक देखभाल और वित्तीय सुरक्षा. चूँकि पहुँच ही स्वास्थ्य सेवा का मूल आधार है लोगों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) को मुख्य रणनीति के तौर पर मान्यता प्रदान की
मार्शल एम. बाउटन
03/06/2019
भारत में हरित क्रांति के सूत्रपात के पाँच से अधिक दशक बीत गये हैं, लेकिन भूख के विरुद्ध हमारा युद्ध अभी तक समाप्त नहीं हुआ है. हमें हरित क्रांति की प्रेरणा तब मिली थी, जब साठ के दशक के मध्य में अच्छी फसल नहीं हुई थी और अकाल के हालात पैदा हो गए थे, लेकिन इसका असली उद्देश्य था, भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और अगर सटीक रूप में कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था. अब हम यह देख सकते हैं कि उस समय अपनाई गई नीतियों में अब तक कोई बड़ा
वाल्टर ऐंडर्सन
20/05/2019

भारत का सबसे अधिक प्रभावशाली गैर सरकारी संगठन (NGO) है, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS). इसका तेज़ी से विकास हुआ है और इसकी चर्चा हाल ही की मेरी पुस्तक ‘The RSS: A View to the Inside’ (सहलेखकः श्रीधर दामले) में की गई है. यह पुस्तक कुछ हद तक मेरी पिछली पुस्तक ‘The Brotherhood in Saffron’ की अगली कड़ी है, जिसमें भारत में आए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों के साथ-साथ इस पुस्तक के प्रकाशित होने के तीन दशक पहले के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) का लेखा-जोखा दिया गया है. 

सूज़न मैथ्यू
06/05/2019
पिछले दशक में भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ, खास तौर पर बांग्ला देश, भूटान और नेपाल के साथ क्षेत्रीय कारोबार कुछ हद तक बढ़ा लिया है. इस समय भारत का दक्षिण एशिया में $19.1 बिलियन डॉलर का वास्तविक कारोबार है. यह कारोबार उसके $637.4 बिलियन डॉलर के कुल वैश्विक कारोबार का मात्र तीन प्रतिशत है और संभावित कारोबार से $43 बिलियन डॉलर कम है. हाल ही के अनुमान के अनुसार मानव-निर्मित कारोबारी प्रतिबंधों में कमी होने से दक्षिण एशिया के कारोबार में तीन गुना वृद्धि हुई है और यह
अशोक गुलाटी
22/04/2019
आज भारत की आबादी 1.35 अरब हो गई है. संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2017 के जनसंख्या-अनुमान के अनुसार वर्ष 2024 तक भारत की कुल आबादी चीन की कुल आबादी से भी अधिक हो जाएगी और वर्ष 2030 तक यह आँकड़ा 1.5 अरब तक पहुँच जाएगा और भारत इस भूमंडल का सबसे अधिक आबादी वाला देश हो जाएगा. लगभग दो-तिहाई भारतीयों की आयु 35 वर्ष से कम है. पिछले दो दशकों से भारत की सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है और इसी