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विदेश नीति और सुरक्षा

भारत-अफ़गानिस्तान “धुरी” और पाकिस्तान का सवाल

अविनाश पालिवाल
भारत-अफ़गानिस्तान के संबंधों की पूरी ताकत का प्रदर्शन 4 दिसंबर, 2016 को अमृतसर में आयोजित छठे हार्ट ऑफ़ एशिया के सम्मेलन में हुआ था. अफ़गान केंद्रित हक्कानी नैटवर्क से संबद्ध “आंतकवादियों” को और भारत केंद्रित लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद को “सुरक्षित पनाह” देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना करते हुए नई दिल्ली और काबुल ने इस मंच का इस्तेमाल इस्लामाबाद को अलग-थलग करने और नीचा दिखाने के लिए सफलतापूर्वक किया. दोनों देशों ने एयर कार्गो के लिए एक ऐसे कॉरिडोर के बारे में भी चर्चा की, जिसमें पाकिस्तान को बाईपास किया जा सके, क्योंकि अफ़गानिस्तान को उनके देश से भारतीय बाज़ारों में और भारतीय बाज़ारों से उनके देश में आवाजाही का रास्ता अभी तक खुल नहीं पाया है.

कारोबार में अल्पसंख्यकः भारत अमरीका के सप्लायर विविधता के कार्यक्रमों से क्या सीख सकता है ?

नरेन करुणाकरन

अमरीकियों के पास लगभग 28 मिलियन छोटे कारोबार हैं. इनमें से 8 मिलियन कारोबार अल्पसंख्यकों के पास हैं और अल्पसंख्यकों के इन कारोबारों से उत्पन्न 64 प्रतिशत नई नौकरियाँ ऐसी हैं, जिनकी शुरुआत 1993 और 2011 के बीच हुई थी. लगभग आधे अमरीकी कामगार इन नौकरियों पर ही लगे हुए हैं. राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की कामयाबी इन्हीं छोटे कारोबारों के कार्य-परिणामों पर ही निर्भर करती है. यह बात तो निःसंकोच मानी जा सकती है कि कई दशकों से सतत चलने वाले सप्लायर डाइवर्सिटी ईको सिस्टम में न तो कोई कटौती हो सकती है और न ही उसके विशेष दर्जे को कोई आघात पहुँच सकता है.

मुल्ला मंसूर के मारे जाने के कारण अफ़गानिस्तान में पाकिस्तान के कम होते विकल्प

अजय शुक्ला
क्या पाकिस्तान ने मुल्ला मुहम्मद मंसूर की मौत का मार्ग सिर्फ़ इसलिए ही प्रशस्त किया था, क्योंकि तालिबान के मुखिया ने काबुल में शांति-वार्ता में भाग लेने से इंकार कर दिया था? आखिरकार मंसूर की ज़िद के कारण ही इस्लामाबाद तालिबान को चतुष्कोणीय समन्वय दल (QCG) के साथ बातचीत के मंच पर लाने के अपने वायदे उत्तराधिकारी मुल्ला हैब्तुल्ला अखुंदज़ा भी उसकी तरह लड़ाई के मैदान में पाई गई कामयाबी को राजनीतिक समझौते में इस तरह से खोने के लिए तैयार नहीं है कि अधिकांश सत्ता काबुल की “कठपुतली सरकार” को मिल जाए? तालिबान की

भारत के नये बिट मॉडल की उपलब्धियाँ और कमियाँ

सुमति चंद्रशेखरन और स्मृति परशीरा

दिसंबर, 2015 में भारत सरकार ने अपने नये मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को सार्वजनिक कर दिया. यह व्यक्तिगत स्तर पर किये गये समझौते के करार का एक टैम्पलेट है, जिसके माध्यम से किसी एक देश की किसी फ़र्म द्वारा दूसरे देश की फ़र्म में किये गये निजी निवेश को शासित किया जाता है.

भारत में रक्षा सुधारः सुरक्षा योजनाओं में स्पष्टता और एकजुटता

फ्रैंक ओ’डॉनेल

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति-निर्माण में परंपरागत रूप में केंद्रीय रणनीतिक योजना की कमी रही हैः जैसे संगठित प्रक्रिया, दीर्घकालीन लक्ष्य निर्धारित करके असैन्य और सैन्य संस्थानों में खरीद और पूर्णता के प्रयास के ज़रिये पूरी तरह से समन्वय लाना. इसके बजाय रक्षा नीति संबंधी गतिविधियों में मुख्यतः खरीद की इच्छा-सूचियों का संग्रह ही होता है. तीनों सैन्य सेवाओं द्वारा मुख्य रूप से प्रधान मंत्री द्वारा समय-समय पर शुरू की गई पहल के साथ-साथ ये सूचियाँ अलग-अलग प्रस्तुत की जाती हैं.

कट्टरपंथी बनाम समझौतावादी : अफ़गानिस्तान के प्रति भारत की नीति संबंधी राजनीति के मूल तत्व

अविनाश पालिवाल
जैसे-जैसे काबुल रावलपिंडी के साथ मेल-मिलाप की कोशिश कर रहा है, भारत की अफ़गानिस्तान-नीति में बदलाव दिखाई देने लगा है. अफ़गानी अधिकारियों के कई बार निवेदन करने पर भी दिल्ली अक्तूबर, 2011 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित और बहुचर्चित द्विपक्षीय रणनीतिक करार पर चर्चा करने और उसकी समीक्षा करने के लिए द्विपक्षीय रणनीतिक भागीदारी परिषद की बैठक आयोजित करने से हिचक रहा है.

भारत आईसीटी के वैश्विक खेल में

ऐन्ड्रू बी. कैनेडी

यदि वैश्वीकरण एक खेल है तो लगता है कि भारत इसके विजेताओं में से एक विजेता हो सकता है.  पिछले दशक में भारत के आर्थिक विकास की दर का रिकॉर्ड बहुत शानदार रहा है और इसने तेज़ी से आगे बढ़ते हुए हाई टैक सैक्टर में प्रवेश पा लिया है. यह संक्रमण जितना आईसीटी (सूचना व संचार प्रौद्योगिकी) में स्पष्ट दिखायी देता है, उतना किसी और सैक्टर में दिखायी नहीं देता. जहाँ चीन ने आईसीटी हार्डवेयर के क्षेत्र में अपना मुकाम हासिल किया है, वहीं भारत ने सॉफ़्टवेयर के क्षेत्र में अपनी शक्ति का लोहा मनवा लिया है.

जापान-भारत संबंधों में प्रत्यक्ष अंतराल

विक्टोरिया टुके

चीन की बढ़ती ताकत के चिंताजनक स्वरूप के मद्देनज़र अनुकूल भूराजनैतिक परिस्थितियों के बावजूद भारत और जापान के आपसी संबंध अभी तक बहुत प्रगाढ़ नहीं हो पाये हैं. दोनों के बीच “प्रत्यक्ष अंतराल" बने रहने के कारण संबंध बहुत प्रगाढ़ नहीं हो पाये हैं.

चीनी-भारतीय संबंधः दिल्ली की रोलर कोस्टर राइड

सी. मोहन राजा

यदि चीनी-भारतीय संबंधों का यही ऐतिहासिक क्रम बना रहता है तो जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में हाल ही में भारत-चीन के सैन्य संबंधों में आये गतिरोध के बाद भी द्विपक्षीय संबंधों में आसन्न कायाकल्प को लेकर जल्द ही भारी प्रचार होगा और यह भी चर्चा होगी कि इससे विश्व में कैसे बदलाव आएगा. भारत ने जब चीन को इस बात के लिए राज़ी कर लिया कि यथास्थिति बनाये रखने में असफल होने के परिणामस्वरूप द्विपक्षीय संबंधों पर भारी असर पड़ सकता है तो भारत के दावित क्षेत्र में चीनी सुरक्षा बलों द्वारा तीन सप्ताह तक जारी घुसपैठ मई के आरंभ में समाप्त हो गयी.

रणनीतिक संस्कृति के रूप में सरकारियत

अनित मुखर्जी

सन् 1992 में प्रायः उद्धृत किये जाने वाले एक निबंध में जॉर्ज टनहम ने निरंतर प्रचारित किंतु सत्य से परे एक भूराजनीतिक विचार को सामने रखा था कि भारतीयों में रणनीतिक संस्कृति का अभाव है. टनहम द्वारा आधुनिक भारत के सभी कूटनीतिज्ञों को एक साथ नकार देने से कुछ भारतीय विचारक बेहद नाराज़ हो गए थे जबकि कुछ लोगों ने उनके इस विचार को अविलंब स्वीकार कर लिया था. हाल ही की  एक कवर स्टोरी में ‘द इकॉनॉमिस्ट’ ने महाशक्ति बनने की भारत की इच्छा के मार्ग में आने वाली अनेक चुनौतियों का विश्लेषण तो अच्छा किया है, लेकिन रणनीतिक संस्कृति की उसकी परिभाषा बौद्धिक रूप से लचर है.