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राजनीति

दक्षिण एशिया में देखभाल की बढ़ती अर्थव्यवस्था

फ्रांसिस कुरियाकोज़ और दीपा ऐय्यर
सन् 2018 में “शानदार काम के भविष्य के लिए देखभाल के काम और उससे जुड़े रोज़गार” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद देखभाल के कामों पर नीति-विषयक बहस छिड़ गई. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पाया कि देखभाल के कामों में बहुत से ऐसे कौशल भी शामिल हैं, जिन्हें न तो

मोदी के दूसरे कार्यकाल में जापान-भारत संबंध

रूपकज्योति बोरा
ओसाका में G20 शिखर वार्ता के आयोजन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार जापान के प्रधानमंत्री आबे से विचार-विमर्श करने का अवसर मिला है. इस वर्ष के आरंभ में हुए आम चुनाव में निर्णायक बहुमत से जीतकर सत्ता पर एक बार फिर काबिज होने के बाद मोदी को और उनकी सरकार को विदेशी मामलों में अधिक लचीलेपन से आगे बढ़ने का अवसर मिला है. इसके अलावा, डॉ. एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाकर उन्होंने यह स्पष्ट संकेत भी दे दिया है कि

राष्ट्र की विविधता के साथ संघर्ष में जूझती भारतीय पुलिस

शकेब अयाज़

सन् 1843 में भारत में जिस पुलिस-व्यवस्था का आरंभ हुआ था, वह अब भी काफ़ी हद तक ब्रिटिश काल के भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 पर ही चलती है और भारत के वर्ग, जाति, लिंग और धार्मिक विविधताओं के साथ संघर्ष में जूझ रही है. भारत में पुलिस व्यवस्था से संबंधित 2018 की रिपोर्ट के अनुसार इसके संभावित कारण प्रशिक्षण, संवेदीकरण की कमी और / या  पुलिसकर्मियों में निहित पक्षपात हो सकते हैं.

अमेरिका का प्रस्थान, भारत का प्रवेश? अफ़गानिस्तान में शांति-प्रक्रिया शुरू

चयनिका सक्सेना
पिछले अठारह वर्षों में अफ़गानिस्तान की स्थिति उतनी ही अस्थिर रही है जितनी तीन दशक पहले थी. सन् 2017 में जब चरमपंथियों को रोकने के लिए नंगरहार में तथाकथित "मदर-ऑफ़-ऑल-बम" गिराया गया था, तब से लेकर अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. या फिर सन् 2001 में जब 25 हितधारकों ने मिलकर “अफ़गानी लोगों के देश में भयानक संघर्ष को खत्म करने और राष्ट्रीय समझौते और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करने और

पलायन का दूसरा पहलूः कश्मीरी सिखों का मामला

खुशदीप कौर मल्होत्रा
20 मार्च, 2000 को अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा की पूर्व संध्या पर दक्षिण कश्मीर के चिट्टी सिंहपोरा गाँव में सशस्त्र विद्रोहियों ने पैंतीस सिख पुरुषों की नृशंसा हत्या कर दी थी. कश्मीर घाटी में कई पीढ़ियों से मुस्लिम भाइयों के साथ सद्भावना के साथ रहने वाले “सबसे कम आबादी वाले अल्पसंख्यक” सिख समुदाय के साथ यह पहली हिंसक वारदात थी. यह वारदात उस इलाके में हुई थी जो जम्मू और कश्मीर के तीन अलग-अलग क्षेत्रों में से एक था, जिन्हें उग्रवाद का बड़ा खामियाजा

भारत-रूसी रक्षा संबंध वाशिंगटन की नाराज़गी को भविष्य में भी झेलते रह सकते हैं

योगेश जोशी
मार्च, 2019 में भारत ने रूस के साथ एक और इसकी अकुला-श्रेणी की हमलावर परमाणु पनडुब्बी (SSN) को पट्टे पर लेने के लिए एक अंतर सरकारी करार (IGA) पर हस्ताक्षर किये. यह परमाणु पनडुब्बी सन् 2025 में रूस के सेवेरोद्विंस्क के आर्कटिक बंदरगाह में पतवार के एक प्रमुख परिशोधन के बाद भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगी. इससे पहले भारत ने सन् 2012 में मास्को से अकुला-श्रेणी के SSBN को

भारत में सूचना की राजनीति

संजय चक्रवर्ती

हाल ही में अंग्रेज़ी में प्रकाशित पुस्तक “हमारे अपने बारे में सचः मनु से मोदी तक भारत में सूचना की राजनीति ” में मैंने यह विमर्श प्रस्तुत किया है कि पिछली दो शताब्दियों में भारत के सामाजिक “सच” कैसे गढ़े गए, उनके आकार ग्रहण करने के कारणों की व्याख्या के साथ-साथ उनके राजनीतिक और सामाजिक दुष्परिणामों को भी वर्णित किया है. अपनी उक्त पुस्तक के विमर्श की रूपरेखा के मुख्य बिंदुओं को मैं सारांश रूप में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ.

नीतियों में अंतर और सार्वभौमिक नेत्र-स्वास्थ्य का पवित्र संकल्प

तुलसीराज रवीला
सन् 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य राष्ट्रों ने स्थायी विकास के लक्ष्य (SDG) निर्धारित करते समय सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का संकल्प भी किया था. सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की प्रक्रिया को तीन तत्वों से परिभाषित किया जाता है: सभी व्यक्तियों और समुदायों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, व्यापक देखभाल और वित्तीय सुरक्षा. चूँकि पहुँच ही स्वास्थ्य सेवा का मूल आधार है लोगों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) को मुख्य रणनीति के तौर पर मान्यता प्रदान की

भारत की हरित क्रांति के अंतर्विरोध

मार्शल एम. बाउटन
भारत में हरित क्रांति के सूत्रपात के पाँच से अधिक दशक बीत गये हैं, लेकिन भूख के विरुद्ध हमारा युद्ध अभी तक समाप्त नहीं हुआ है. हमें हरित क्रांति की प्रेरणा तब मिली थी, जब साठ के दशक के मध्य में अच्छी फसल नहीं हुई थी और अकाल के हालात पैदा हो गए थे, लेकिन इसका असली उद्देश्य था, भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और अगर सटीक रूप में कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था. अब हम यह देख सकते हैं कि उस समय अपनाई गई नीतियों में अब तक कोई बड़ा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ: अंदर की एक झलक

वाल्टर ऐंडर्सन

भारत का सबसे अधिक प्रभावशाली गैर सरकारी संगठन (NGO) है, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS). इसका तेज़ी से विकास हुआ है और इसकी चर्चा हाल ही की मेरी पुस्तक ‘The RSS: A View to the Inside’ (सहलेखकः श्रीधर दामले) में की गई है. यह पुस्तक कुछ हद तक मेरी पिछली पुस्तक ‘The Brotherhood in Saffron’ की अगली कड़ी है, जिसमें भारत में आए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों के साथ-साथ इस पुस्तक के प्रकाशित होने के तीन दशक पहले के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) का लेखा-जोखा दिया गया है.