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राजनीति

भारत के भूमिगत जल के निष्कासन का भविष्य

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08/05/2017
ईशा झवेरी
हर साल जून से सितंबर के अंत तक ग्रीष्म ऋतु की मानसूनी बरसात भारत के दक्षिणी तट से शुरू होकर धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ती जाती है, जिसमें भारत की वार्षिक बरसात के 80 प्रतिशत भाग की आपूर्ति होती है. नदियाँ कल-कल करके बहने लगती हैं, खेतों में बुवाई होने लगती है और जलवाही स्तर और जलाशय पानी से लबालब भरने लगते हैं. इसके फलस्वरूप गर्मी की चिलचिलाती धूप के बाद खेती-बाड़ी की गतिविधियों में बहार आ जाती है, लेकिन इस हर्षोल्लास में कहीं गहरे में बेहद दबाव से गुज़रती कृषि प्रणाली भी अंतर्निहित होती है. साठ के दशक से भारत के भूमिगत जल से होने वाली सिंचाई में नाटकीय रूप में उछाल आया है और यह देश की अर्थव्यवस्था और लोकजीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगी है. इससे 260 मिलियन से अधिक

ऊर्जा स्थलों और जलवायु परिवर्तन के कार्यस्थलों के रूप में भारतीय शहर

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24/04/2017
राधिका खोसला
आजकल शहरों को स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के लिए रणनीतिक कार्यस्थलों के रूप में देखा जाता है. संयुक्त राष्ट्र के 2015 के स्थायी विकास के लक्ष्यों में पहली बार स्पष्ट रूप में शहरी लक्ष्य को भी शामिल किया गया है और 2015 के पेरिस जलवायु के करार में राष्ट्रीय विकास के संदर्भों में जलवायु के अनुकूल परिणामों के लिए नई गुंजाइश रखी गई है. शहरों में ऊर्जा-जलवायु संबंधों पर ध्यान देना भारत के लिए खास तौर पर सामयिक है. इसे सन् 2040 तक वैश्विक ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के एक चौथाई अंश के रूप में प्रक्षेपित किया गया है. बहुत हद तक इस वृद्धि का श्रेय देश के मौजूदा आर्थिक और सामाजिक संक्रमणों को दिया जा सकता है. भारतीय शहरों को सन् 2030 तक 300 मिलियन अधिक लोगों के

पर्यावरण के लिए अनुकूल रोड नैटवर्क बनाने के लिए सुनियोजित योजना

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10/04/2017
शशांक श्रीनिवासन
भारत को ज़रूरत है सड़कों की. देश भर में माल-असबाब और लोगों के निर्बाध आवागमन के लिए हमारे लिए रोड नैटवर्क बेहद आवश्यक है और इसकी मदद से ग्रामीण इलाके भी पूरे देश से जुड़ जाएँगे. रेल मार्ग और भारत की सड़कें सारे देश में एकता स्थापित करती हैं, लेकिन सवाल यह है कि भारत में कितनी सड़कें होनी चाहिए? यह तो स्पष्ट हो ही जाना चाहिए कि देश के अधिक से अधिक कितने इलाके में रोड नैटवर्क होना चाहिए. अगर हम सड़क पर आने वाली भारी लागत को थोड़ी देर के लिए छोड़ भी दें तो भी अवसर की लागत पर विचार तो होना ही चाहिए; यह भी स्पष्ट है कि सड़क-निर्माण के लिए आबंटित ज़मीन का उपयोग किसी और काम के लिए नहीं किया जा सकता. साथ ही कुछ और बातों पर भी

भारत में राजनीति किस प्रकार सड़क व्यवस्था को प्रभावित करती है

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27/03/2017
अंजली थॉमस बॉलकेन
भारत सरकार हर साल नागरिकों को पानी, साफ़-सफ़ाई, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने के लिए सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे से संबंधित कार्यक्रमों को लागू करने के लिए भारी मात्रा में संसाधन जुटाती रही है. हालाँकि इन सभी प्रयासों से आम आदमी के जीवन-स्तर को सुधारने में बहुत हद तक मदद मिलने की संभावना होती है, फिर भी राजनैतिक प्रभाव की वजह से व्यापक रूप में आलोचना का शिकार होने के कारण इनके कार्यान्वयन में देरी होती रही है. लेकिन असल में ये राजनैतिक प्रभाव भारत में किस प्रकार सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के कार्यान्वयन को प्रभावित करते हैं? इस सवाल के जवाब से ही हम समझ पाएँगे कि भले ही राजनैतिक हस्तक्षेप को टाला तो नहीं जा

अनुसूचित जनजाति का दर्जाः स्पष्टीकरण की आवश्यकता

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13/03/2017
क्रिस्टिना- आयोना ड्रैगोमीर
भारत के संविधान में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा प्राप्त करने वाले समुदायों को कुछ संरक्षण प्रदान किये जाते हैं, लेकिन यह बात हमेशा ही विवादग्रस्त रही है कि किन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान किया जाए. अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने का अर्थ है कि इन समुदायों को राजनैतिक प्रतिनिधित्व के रूप में, स्कूलों में आरक्षित सीटों के रूप में और सरकारी नौकरियों के रूप में वांछित ठोस लाभ प्राप्त होना. पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक और राजनैतिक लामबंदी के कारण अनुसूचित जनजातियों की संख्या अब (एक से अधिक राज्यों में एक दूसरे से टकराती हुई) 700 तक पहुँच गई है, जबकि सन् 1960 में इनकी संख्या 225 थी. जैसे-जैसे अनुसूचित जनजातियों का दर्जा हासिल

उड़ान-योजनाओं में अवरोधः भारतीय ड्रोन उद्योग के विनियमों में व्याप्त उदासीनता

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27/02/2017
अनंत पद्मनाभन

लगभग एक साल पहले नागरिक विमानन के भारतीय महानिदेशालय (DGCA) ने ड्रोन के दिशा-निर्देशों का प्रारूप जारी किया था. भारत में अपेक्षाकृत नया उद्योग होने के कारण इन विनियमों के महत्व को देखते हुए अनेक उद्योग निकायों और स्टार्टअप्स ने इस पर अपना फ़ीडबैक दिया था और समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया था. इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि ड्रोन के अनेक व्यावहारिक उपयोग हैं. भारत में कुछ स्टार्टअप तो ऐसे हैं जो ड्रोन में विभिन्न क्षेत्रों में अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में जुटे हैं. जैसे, आपदा प्रबंधन, सटीक (प्रिसीज़न) खेती-बाड़ी और फसल बीमा, खनन, बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाएँ और भूमि अभिलेख.

बांग्लादेश-भारत संबंधः भूमि सीमा करार के लेंस के ज़रिये

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13/02/2017
तमीना एम. चौधुरी
बांग्लादेश-भारत संबंध कदाचित् उप महाद्वीप में सबसे अधिक जटिल द्विपक्षीय संबंध हैं. सन् 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद से ही यह धारणा बनी रही है कि भारत की भूमिका पाकिस्तान के विरुद्ध मात्र अपने राष्ट्र हितों को साधने की रही है. सन् 1972 में शांति और मैत्री की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद दोनों ही देश आपसी संबंधों को सुधारने का प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. यही कारण है कि ज़मीन, पानी, अवैध आप्रवासन और सीमा सुरक्षा जैसे दशकों पुराने मुद्दे अभी तक सुलझ नहीं पाए हैं. उसी तरह बांग्लादेश भारत के बाज़ारों में खास तौर पर व्यापक रूप में निर्यात-योग्य अपने कपड़ों के उत्पादों की पहुँच बनाने में भी सफल नहीं हो पाया है.

विमुद्रीकरणः साफ़ तौर पर विध्वंस की राजनीति

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30/01/2017
अक्षय मंगला
8 नवंबर, 2016 को टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी घोषणा की, जिससे सभी स्तब्ध रह गए. इसी दिन मध्यरात्रि से ₹500 और ₹1,000 के मूल्य-वर्ग के नोट अवैध हो जाएँगे. इस समय जो नकदी प्रचलन में है, वह एक अनुमान के अनुसार कुल नकदी का लगभग 86 प्रतिशत (₹15 ट्रिलियन) है. ऐसे अवैध नोट रखने वालों से कहा गया है कि वे 30 दिसंबर, 2016 तक बैंक में विमुद्रीकृत नोटों का विनिमय कर लें या उन्हें बैंक में जमा करा दें. इस विध्वंसकारी नीति को अपनाने का घोषित कारण यही बताया गया है कि इससे “काले धन” पर रोक लगायी जा सकेगी. “काले धन” का मतलब है, ऐसा धन जो अघोषित स्रोतों से अर्जित किया गया हो. साथ ही एक घोषित कारण यह भी बताया गया कि इससे आपराधिक और आतंकवादी

सत्ता की सीमाएँ: विश्व की बदलती व्यवस्था के विरुद्ध पाकिस्तान की नीति

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16/01/2017
जोहान चाको
फ़रवरी 2014 में आईबी के भूतपूर्व प्रमुख अजित दोवाल ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पदभार ग्रहण करने से कुछ समय पहले ही अपने लंबे सार्वजनिक बयान के माध्यम से एक बड़े नीतिगत परिवर्तन की घोषणा की थी. भारत में अलगाववादी और उग्रवादी गुटों को पाकिस्तान से मिलने वाली मदद को उन्होंने एक रणनीतिक चुनौती के रूप में घोषित किया था और उसका मुकाबले करने के लिए उससे कहीं बड़े ठोस प्रतिरोध की बात भी कही थी. इसी घोषणा में बलोचिस्तान को अलग करने की बात भी शामिल थी. हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने भी दावा किया था कि “विश्व एक स्वर से पाकिस्तान के संबंध में भारत की नीति का समर्थन करने लगा है” और भारत से यह माँग भी करने लगा है कि “भारत वैश्विक स्तर पर

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की नीतियाँ

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02/01/2017
नीलांजन सरकार
30 दिसंबर, 2016 को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने अपने ही बेटे अखिलेश यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया. सिर्फ़ एक दिन के बाद ही निष्कासन आदेश को वापस ले लिया गया और अखिलेश यादव को फिर से अपने पद पर बहाल कर दिया गया. उत्तर प्रदेश (यूपी) के करिश्माई नेता अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी पर अपनी पकड़ मज़बूत करना शुरू कर दिया था. यही बात कुछ हद तक पार्टी के बुजुर्ग नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों को चुभ गई. चुनाव आयोग यूपी में चुनाव की तारीखों की घोषणा करने वाला है. समाजवादी पार्टी के पास अपनी पार्टी में गुटबाज़ी को खत्म करने के लिए बहुत कम समय बाकी है. इसलिए यह समय उनके लिए बहुत कीमती है. किसी को नहीं मालूम कि कल क्या होगा ? स्वाभाविक है कि दैनिक समाचार