Penn Calendar Penn A-Z School of Arts and Sciences University of Pennsylvania

राजनीति

निजता या प्राइवेसी के बाद ‘आधार'

माधव खोसला व अनंत पद्मनाभन
निजता या प्राइवेसी के संबंध में भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल ही में निजता के अधिकार की पुष्टि करते हुए जो निर्णय (न्यायमूर्ति पुत्तास्वामी बनाम भारतीय संघ) दिया गया है, उसके बाद देश के विवादास्पद बायोमैट्रिक प्रोग्राम ‘आधार’ के साथ सरकार ने पहचान के विभिन्न प्रकार के नंबरों और कल्याणकारी योजनाओं को जोड़ने के

किसान के नाम पर

मेखला कृष्णमूर्ति

भारत के कृषि विपणन और वितरण प्रणाली में थोक बाज़ारों या मंडियों की विशेष भूमिका है.इस प्रकार भारतीय कृषि के भविष्य के बारे में होने वाले महत्वपूर्ण वाद-विवाद में महत्वपूर्ण तत्व हैं, खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने की और खाद्य संबंधी मुद्रास्फीति के प्रबंधन की चुनौतियाँ और राष्ट्र के खाद्यमार्गों के विशाखन के चरित्र और नियंत्रण पर उठते प्रश्न. राज्य के विपणन संबंधी विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत स्थापित और स्थानीय रूप में गठित कृषि उपज विपणन समितियों (APMCs) के प्रबंधन के अंतर्गत मंडी ही किसानों और उनकी उपज के पहले खरीदारों के बीच “पहला महत्वपूर्ण लेन-देन” होता है.

स्थायी संसदीय समितियों का कार्य-संचालन

एम. आर. माधवन
लोकतंत्र निर्वाचित संस्थाओं के संचालन से ही विधिमान्य बनता है. संसद अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण कार्यों को संपन्न करते हुए भारत के लोकतंत्र में अपनी केंद्रीय भूमिका का निर्वाह करता है. प्रधान मंत्री (और मंत्रिमंडल) को हर समय प्रत्यक्ष रूप में निर्वाचित लोकसभा के बहुमत का समर्थन अपेक्षित होता है. लोकसभा और परोक्ष रूप में निर्वाचित राज्यसभा अपने प्रश्नकाल में पूछे गए सवालों और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर की जाने वाली बहस और प्रस्तावों जैसी अनेक प्रक्रियाओँ के द्वारा

टोक्यो और नई दिल्ली की बढ़ती नज़दीकियों के क्या कारण हैं ?

रूपकज्योति बोरा

अगस्त 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंज़ो आबे ने अपने आरंभिक कार्यकाल के दौरान "दो सागरों के संगम” पर दिये गये अपने ऐतिहासिक भाषण में टिप्पणी की थी कि "प्रशांत और हिंद महासागर अब मिलकर स्वतंत्रता और समृद्धि के समुद्र के रूप में गतिशील हो रहे हैं.”  पिछली कालावधि के रिश्तों के विपरीत जापान और भारत के बीच अब जिस तेज़ी के साथ रिश्तों में गर्माहट बढ़ी है, वह अभूतपूर्व है.

दक्षिण एशिया में चीन के प्रतिकार के लिए “समान विचारधारा वाले” देशों की भागीदारी

कॉन्स्टेंटिनो ज़ेवियर

वर्ष 2000 के मध्य से दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभुत्व के कारण इस क्षेत्र में पाकिस्तान से लेकर म्याँमार तक और हिंद महासागर में भी भारत का परंपरागत दबदबा कुछ कम हो गया है. चूँकि बीजिंग पूरे उप महाद्वीप में इतनी भारी मात्रा में वित्तीय निवेश करता है और अपनी रणनीतिक धौंस जमाता है कि नई दिल्ली को अपने रणनीतिक ढंग से भारी क्षमताओं वाली चीनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

भारत में खुफ़िया तंत्र और विदेश-नीति निर्माण की प्रक्रिया

अविनाश पालीवाल
भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी (नई दिल्ली के अनुसार) कमांडर कुलभूषण जाधव मार्च, 2016 से पाकिस्तानी जेल में हैं और उनके मुकदमे को लेकर जनता में खासी चर्चा हो रही है. पाकिस्तान ने उन पर भारत की प्रमुख खुफ़िया एजेंसी रॉ के लिए काम करने का आरोप लगाया है और अप्रैल, 2017 में उनका कोर्ट मार्शल किया गया और पाकिस्तान में “आतंकवादी” गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त पाये जाने पर उन्हें मृत्युदंड की सज़ा दी गयी.

क्या सार्वजनिक सेवाओं में सुधार लाने से ग्राहकवाद में कमी आ सकती है?

ओलिवर हीथ और लुईस टिलिन
भारत सरकार के भारत के आर्थिक सर्वेक्षण में इस बात पर खेद प्रकट किया गया है कि भारतीय राज्य “प्रतियोगी सर्विस डिलीवरी” के बजाय “प्रतियोगी लोकप्रियता” (अर्थात् माल और सेवाएँ देने) में अधिक दिलचस्पी

धीमी गति और जड़ता से भरे संबंध : अमरीकी-भारत रक्षा और सुरक्षा संबंधों का अगला कदम

जोशुआ टी.व्हाइट
राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के बीच जून माह में हुई शिखर वार्ता के बाद अमरीका और भारत दोनों देशों के नीति विशेषज्ञों ने चैन की साँस ली. आशंका के विपरीत कुछ लोगों को एक दूसरे से मुलाकात करते समय दोनों नेताओं के हाव-भाव और निर्णय भी बेहद सकारात्मक लगे. इस

भारतीय मतदाता उम्मीदवार चुनने के लिए त्वचा के रंग का उपयोग कैसे करते हैं

अमित आहुजा
भारत के लोग त्वचा के रंग पर बहुत ज़ोर देते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि माँ-बाप का ध्यान अपने नवजात शिशु की दो बातों पर रहता हैः शिशु लड़का है या लड़की और उसका रंग कैसा है, गोरा या काला. सन् 2014 में भारतीयों ने ₹ 3,695 करोड़ ($550 मिलियन) गोरा करने वाले उत्पादों पर खर्च

आर्थिक शक्ति का प्रदर्शन

ऋषिका चौहान
रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को एक बेहद अहम काम करना है. दोनों प्रधानमंत्रियों को भारत-नेपाल संबंधों (पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल द्वारा पुनर्जीवित संबंधों) की निरंतरता को बनाये रखना है और दहल के पूर्ववर्ती खड्ग प्रसाद शर्मा ओली के कार्यकाल के दौरान उपजी कटुता को भी कम करना है. हालाँकि ओली के कार्यकाल के दौरान