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राजनीति

पर्यावरण के लिए अनुकूल रोड नैटवर्क बनाने के लिए सुनियोजित योजना

शशांक श्रीनिवासन
भारत को ज़रूरत है सड़कों की. देश भर में माल-असबाब और लोगों के निर्बाध आवागमन के लिए हमारे लिए रोड नैटवर्क बेहद आवश्यक है और इसकी मदद से ग्रामीण इलाके भी पूरे देश से जुड़ जाएँगे. रेल मार्ग और भारत की सड़कें सारे देश में एकता स्थापित करती हैं, लेकिन सवाल यह है कि भारत में कितनी सड़कें होनी चाहिए?

भारत में राजनीति किस प्रकार सड़क व्यवस्था को प्रभावित करती है

अंजली थॉमस बॉलकेन
भारत सरकार हर साल नागरिकों को पानी, साफ़-सफ़ाई, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने के लिए सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे से संबंधित कार्यक्रमों को लागू करने के लिए भारी मात्रा में संसाधन जुटाती रही है. हालाँकि इन सभी प्रयासों से आम आदमी के जीवन-स्तर को सुधारने में बहुत हद तक मदद मिलने

अनुसूचित जनजाति का दर्जाः स्पष्टीकरण की आवश्यकता

क्रिस्टिना- आयोना ड्रैगोमीर
भारत के संविधान में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा प्राप्त करने वाले समुदायों को कुछ संरक्षण प्रदान किये जाते हैं, लेकिन यह बात हमेशा ही विवादग्रस्त रही है कि किन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान किया जाए. अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने का अर्थ है कि इन समुदायों को राजनैतिक प्रतिनिधित्व के

उड़ान-योजनाओं में अवरोधः भारतीय ड्रोन उद्योग के विनियमों में व्याप्त उदासीनता

अनंत पद्मनाभन
लगभग एक साल पहले नागरिक विमानन के भारतीय महानिदेशालय (DGCA) ने ड्रोन के दिशा-निर्देशों का प्रारूप जारी किया था. भारत में अपेक्षाकृत नया उद्योग होने के कारण इन विनियमों के महत्व को देखते हुए अनेक उद्योग निकायों और स्टार्टअप्स ने इस पर अपना फ़ीडबैक दिया था और समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया था. इस बात पर

बांग्लादेश-भारत संबंधः भूमि सीमा करार के लेंस के ज़रिये

तमीना एम. चौधुरी
बांग्लादेश-भारत संबंध कदाचित् उप महाद्वीप में सबसे अधिक जटिल द्विपक्षीय संबंध हैं. सन् 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद से ही यह धारणा बनी रही है कि भारत की भूमिका पाकिस्तान के विरुद्ध मात्र अपने राष्ट्र हितों को साधने की रही है. सन् 1972 में शांति और मैत्री की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद दोनों ही देश आपसी संबंधों को सुधारने का प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें

विमुद्रीकरणः साफ़ तौर पर विध्वंस की राजनीति

अक्षय मंगला
8 नवंबर, 2016 को टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी घोषणा की, जिससे सभी स्तब्ध रह गए. इसी दिन मध्यरात्रि से ₹500 और ₹1,000 के मूल्य-वर्ग के नोट अवैध हो जाएँगे. इस समय जो नकदी प्रचलन में है, वह एक अनुमान के अनुसार कुल नकदी का लगभग 86

सत्ता की सीमाएँ: विश्व की बदलती व्यवस्था के विरुद्ध पाकिस्तान की नीति

जोहान चाको
फ़रवरी 2014 में आईबी के भूतपूर्व प्रमुख अजित दोवाल ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पदभार ग्रहण करने से कुछ समय पहले ही अपने लंबे सार्वजनिक बयान के माध्यम से एक बड़े नीतिगत परिवर्तन की घोषणा की थी. भारत में अलगाववादी और

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की नीतियाँ

नीलांजन सरकार
30 दिसंबर, 2016 को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने अपने ही बेटे अखिलेश यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया. सिर्फ़ एक दिन के बाद ही निष्कासन आदेश को वापस ले लिया गया और अखिलेश यादव को फिर से अपने पद पर बहाल कर दिया गया. उत्तर प्रदेश (यूपी) के करिश्माई नेता अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी पर अपनी पकड़ मज़बूत करना शुरू कर दिया था. यही बात कुछ हद तक पार्टी के बुजुर्ग नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों को चुभ गई. चुनाव आयोग यूपी में चुनाव की तारीखों की घोषणा करने वाला है. समाजवादी पार्टी के पास अपनी पार्टी में गुटबाज़ी को खत्म करने के लिए बहुत कम समय बाकी है. इसलिए यह समय उनके लिए बहुत कीमती है. किसी को नहीं मालूम कि कल क्या होगा ? स्वाभाविक है कि दैनिक समाचार

भारत-अफ़गानिस्तान “धुरी” और पाकिस्तान का सवाल

अविनाश पालिवाल
भारत-अफ़गानिस्तान के संबंधों की पूरी ताकत का प्रदर्शन 4 दिसंबर, 2016 को अमृतसर में आयोजित छठे हार्ट ऑफ़ एशिया के सम्मेलन में हुआ था. अफ़गान केंद्रित हक्कानी नैटवर्क से संबद्ध “आंतकवादियों” को और भारत केंद्रित लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद को “सुरक्षित पनाह” देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना करते हुए नई दिल्ली और काबुल ने इस मंच का इस्तेमाल इस्लामाबाद को अलग-थलग करने और नीचा दिखाने के लिए सफलतापूर्वक किया. दोनों देशों ने एयर कार्गो के लिए एक ऐसे कॉरिडोर के बारे में भी चर्चा की, जिसमें पाकिस्तान को बाईपास किया जा सके, क्योंकि अफ़गानिस्तान को उनके देश से भारतीय बाज़ारों में और भारतीय बाज़ारों से उनके देश में आवाजाही का रास्ता अभी तक खुल नहीं पाया है.

संकट, भ्रष्टाचार और विश्वसनीयताः भारत में सरकारी व्यवहार का स्वरूप-निर्धारण

बिलाल बलोच
2011 के आरंभ से लेकर 2012 के अंत तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की यूपीए की गठबंधन सरकार ने भारत के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के रूप में सबसे बड़ी नागरिक चुनौती का सामना किया था. यह आंदोलन वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से जुड़े उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार के घोटालों के लगातार बढ़ने के कारण हुआ था. सन् 2009 में चुनाव में दुबारा सफलता मिलने के बाद यूपीए ने अपने-आपको विश्वसनीयता के संकट और भ्रष्टाचार के बीच फँसा हुआ पाया. भ्रष्टाचार-विरोधी राष्ट्रव्यापी आंदोलनों ने विश्व भर के विकासशील लोकतांत्रिक देशों में 2013 की ग्रीष्म ऋतु की चिलचिलाती धूप में नागरिकों के आक्रोश को स्वर प्रदान किया. टर्की जैसे कुछ लोकतांत्रिक देशों ने इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप