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राजनीति

नीतियों में अंतर और सार्वभौमिक नेत्र-स्वास्थ्य का पवित्र संकल्प

तुलसीराज रवीला
सन् 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य राष्ट्रों ने स्थायी विकास के लक्ष्य (SDG) निर्धारित करते समय सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का संकल्प भी किया था. सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की प्रक्रिया को तीन तत्वों से परिभाषित किया जाता है: सभी व्यक्तियों और समुदायों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, व्यापक देखभाल और वित्तीय सुरक्षा. चूँकि पहुँच ही स्वास्थ्य सेवा का मूल आधार है लोगों को स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराना, इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) को मुख्य रणनीति के तौर पर मान्यता प्रदान की

भारत की हरित क्रांति के अंतर्विरोध

मार्शल एम. बाउटन
भारत में हरित क्रांति के सूत्रपात के पाँच से अधिक दशक बीत गये हैं, लेकिन भूख के विरुद्ध हमारा युद्ध अभी तक समाप्त नहीं हुआ है. हमें हरित क्रांति की प्रेरणा तब मिली थी, जब साठ के दशक के मध्य में अच्छी फसल नहीं हुई थी और अकाल के हालात पैदा हो गए थे, लेकिन इसका असली उद्देश्य था, भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और अगर सटीक रूप में कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था. अब हम यह देख सकते हैं कि उस समय अपनाई गई नीतियों में अब तक कोई बड़ा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ: अंदर की एक झलक

वाल्टर ऐंडर्सन

भारत का सबसे अधिक प्रभावशाली गैर सरकारी संगठन (NGO) है, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS). इसका तेज़ी से विकास हुआ है और इसकी चर्चा हाल ही की मेरी पुस्तक ‘The RSS: A View to the Inside’ (सहलेखकः श्रीधर दामले) में की गई है. यह पुस्तक कुछ हद तक मेरी पिछली पुस्तक ‘The Brotherhood in Saffron’ की अगली कड़ी है, जिसमें भारत में आए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों के साथ-साथ इस पुस्तक के प्रकाशित होने के तीन दशक पहले के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) का लेखा-जोखा दिया गया है. 

अपने पुराने पड़ोसी देशों के साथ भारत के नये कारोबारी रिश्ते

सूज़न मैथ्यू
पिछले दशक में भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ, खास तौर पर बांग्ला देश, भूटान और नेपाल के साथ क्षेत्रीय कारोबार कुछ हद तक बढ़ा लिया है. इस समय भारत का दक्षिण एशिया में $19.1 बिलियन डॉलर का वास्तविक कारोबार है. यह कारोबार उसके $637.4 बिलियन डॉलर के कुल वैश्विक कारोबार का मात्र तीन प्रतिशत है और संभावित कारोबार से $43 बिलियन डॉलर कम है. हाल ही के अनुमान के अनुसार मानव-निर्मित कारोबारी प्रतिबंधों में कमी होने से दक्षिण एशिया के कारोबार में तीन गुना वृद्धि हुई है और यह

कौन भारत का पेट भरेगा? खाद्य और कृषि नीतियों की राजनीतिक अर्थव्यवस्था और इसका तात्पर्य

अशोक गुलाटी
आज भारत की आबादी 1.35 अरब हो गई है. संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2017 के जनसंख्या-अनुमान के अनुसार वर्ष 2024 तक भारत की कुल आबादी चीन की कुल आबादी से भी अधिक हो जाएगी और वर्ष 2030 तक यह आँकड़ा 1.5 अरब तक पहुँच जाएगा और भारत इस भूमंडल का सबसे अधिक आबादी वाला देश हो जाएगा. लगभग दो-तिहाई भारतीयों की आयु 35 वर्ष से कम है. पिछले दो दशकों से भारत की सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है और इसी

विदेश नीति का “ हिंदुत्व चेहरा” ? भारत की 2014-19 की विदेश नीति पर प्रतिबिंब

अर्ड्न्ट माइकल
2014 के चुनावों के कुछ समय पहले, नरेंद्र मोदी विदेशी मामलों में पूरी तरह से कोरे थे. उस समय उन्होंने अपने एक इंरटरव्यू में कहा था, “ अन्य देशों के साथ विदेशी मामलों में व्यवहार करते समय मेरा हिंदुत्व का चेहरा बहुत उपयोगी सिद्ध होगा.” उनका यह बयान एक सख्त वैचारिक और मुखर विदेश नीति का संकेत हो सकता था, जिसने भारत को उसकी सभी भावी गतिविधियों में प्रथम बनाये रखा. फिर भी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की विदेश नीति के पाँच वर्षों के

भारत में उभरती वयस्क पीढ़ी के निर्णय लेने की प्रक्रिया

दीया मित्रा

1980-99 के बीच जन्मे इस सहस्राब्दी के बच्चों (Millennials) को लगातार मैं पीढ़ी (Generation Me) के रूप में वर्णित किया जाता है. उनका न तो सही तौर पर प्रतिनिधित्व होता है और न ही उन्हें सराहा जाता है और उन्हें स्टीरियोटाइप बना दिया जाता है. उन्हें अक्सर गैर-ज़िम्मेदार और आलसी किस्म के युवाओं के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन हाल ही में सहस्राब्दी की पीढ़ी (Millennials) के रूप में वर्णित इन युवाओं पर मीडिया का काफ़ी ध्यान आकर्षित हुआ है.

मुझे फ़ोन करें, हो भी सकता है? अमरीका की तालिबान हॉटलाइन और भारत की अफ़गानिस्तान में वापसी

चयनिका सक्सेना
अफ़गानिस्तान के संघर्ष को समाप्त करने के प्रयोजन से तालिबान के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए नियुक्त अमरीका के विशेष प्रतिनिधि ज़ल्मय खलीलज़ाद द्वारा की गई पहल अनेक प्रकार की पहलों में से एक महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि उन्होंने तालिबान को अमरीका के साथ संपर्क साधने के लिए सीधी हॉटलाइन दे दी है. असल में बात यह है कि अमरीका ने तालिबान को जो सुविधा अब प्रदान की है, वह सुविधा उसने तालिबान को

कोयले में निवेश न करने का निर्णय एक कुंद औजार है

रोहित चंद्र
पिछले पाँच वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में कोयला उद्योग से वित्तीय पूँजी की वापसी को लेकर धीरे-धीरे आम सहमति बनने लगी है. विशाल और स्वायत्त समृद्धि निधि और पेंशन निधि एवं विश्व बैंक जैसी बहुराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने कोयले के वित्तपोषण से बाहर निकलने की घोषणा करते हुए इसका संकेत दे दिया है. बढ़ती विनियामक लागत के कारण जहाँ एक ओर पश्चिम के कोयला-आधारित उत्पादकों ने पहले ही अपने पैर समेट लिये हैं, वहीं एशिया के, खास तौर पर भारत और चीन के उत्पादकों ने कोयला क्षेत्र के

आंतरिक प्रवासन के विरुद्ध संघर्ष

रिखिल आर. भावनानी & बेथानी लेसिना
पश्चिम में ब्रैक्सिट और अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प और हंगरी के विक्टर ऑर्बन जैसे दक्षिणपंथी लोकप्रिय नेताओं के उदय का मुख्य कारण वैश्वीकरण को माना जाता है. खास तौर पर बहुत-से लोग तो यह तर्क भी देते हैं कि विशेष प्रकार के वैश्वीकरण से उत्पन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन पर लगाम न लगने के कारण ही “भूमिपुत्र