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विज्ञान और प्रौद्योगिकी

क्या भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली कोविड-19 की विश्वव्यापी महामारी का सामना करने के लिए तैयार है?

टी. सुंदररामण

अचानक ही सिर्फ़ छह सप्ताहों में कोविड-19 की विश्वव्यापी महामारी हम पर हावी हो गई है.

स्वास्थ्य-सेवा पर केंद्रित कारखाने: भारत में बढ़ते रोगियों और घटते संसाधनों का स्वास्थ्य-सेवा संबंधी ईको सिस्टम

स्वामिनाथन सुब्रमणियम
सभी देश यह प्रयास करते हैं कि वे अपने नागरिकों को किफ़ायती और अच्छे किस्म की स्वास्थ्य-सेवा उपलब्ध कराएँ. अगर भारत जैसे कम संसाधनों वाले देश को ये दो लक्ष्य ( किफ़ायती और अच्छी स्वास्थ्य सेवा) प्राप्त करने हैं तो उसे स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले मॉडल को नये सिरे से विकसित करना होगा. भारत के सामने दो प्रमुख वास्तविकताएँ हैं: भारी जनसंख्या और प्रति व्यक्ति

अंतरिक्ष युद्ध और प्रदूषण पर मिशन शक्ति का प्रभाव

निवेदिता राजू
रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च,2019 का अपना संबोधन इस घोषणा के साथ आरंभ किया था कि “भारत अब वैश्विक महाशक्ति बन गया है.” उनका यह बयान इस धारणा पर आधारित था कि उपग्रह-विरोधी हथियारों का यह परीक्षण (ASAT) अंतरिक्ष किराये पर लेने वाले एक राष्ट्र के रूप में भारत की स्थिति को स्थापित करने के लिए यह “अनिवार्य” था, लेकिन किफ़ायती दरों पर नवोन्मेषकारी टैक्नोलॉजी के निर्माण की अनूठी क्षमता के कारण भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई दशकों

भारत का नागरिक ड्रोन उद्योगः ड्रोन विनियमन के लिए सिविल सोसायटी की व्यापक भूमिका आवश्यक

शशांक श्रीनिवासन
7 अक्तूबर, 2014 को लगता है कि मानवरहित हवाई वाहन (अर्थात् UAVs; जिसे आम भाषा में ड्रोन कहा जाता है) के निर्माण और संचालन के क्षेत्र में भारत के विश्व-नेता बनने की आकांक्षाओं पर रातों-रात तुषारापात हो गया. भारत में नागरिक उड्डयन के विनियामक महानिदेशक, नागरिक उड्डयन (DGCA) ने एक संक्षिप्त सार्वजनिक सूचना जारी करके हर प्रकार की गैर-सरकारी संस्था या व्यक्ति को किसी भी प्रयोजन के लिए संरक्षा और सुरक्षा के कारणों से UAVs अर्थात् ड्रोन को उड़ाने पर

स्वचालन (ऑटोमेशन) और भारत में काम-धंधों का भविष्य

फ्रांसिस कुरियाकोज़ व दीपा ऐयर
हम कृत्रिम बुद्धि (AI) के ऐसे युग में रहते हैं जिसने हमें प्रोसेसिंग की ज़बर्दस्त शक्ति, भंडारण की क्षमता और सूचना तक पहुँचने की शक्ति प्रदान की है. इसी प्रौद्योगिकी के बढ़ते विकास के पहले चरण में हमें चरखा, दूसरे चरण में बिजली और औद्योगिक क्रांति के तीसरे चरण में कंप्यूटर की सौगात मिली. सन् 2016 में विश्व

मैट्रो रेल परियोजनाओं के संबंध में भारत के प्रबल आकर्षण पर चेतावनी का संकेत

मीनाक्षी सिन्हा

कोलकाता में पहली मैट्रो परियोजना के बाद भारत को लगभग दो दशक का समय लगा जब दूसरी मैट्रो रेल परियोजना सन् 2002 में दिल्ली में शुरू हुई. लेकिन उसके बाद भारत के विभिन्न शहरों में मैट्रो रेल परियोजनाओं की झड़ी लग गई. पिछले एक दशक में भारत के तेरह से अधिक शहरों में मैट्रो रेल प्रणालियों को मंजूरी प्रदान की गई और कई राज्य ऐसे हैं जो केंद्र सरकार से अभी-भी मैट्रो रेल परियोजनाओं की मंजूरी मिलने की बाट जोह रहे हैं.

भारत के आंतरिक जल विवाद

स्कॉट मूर
लगभग पंद्रह साल पहले भारत के केंद्रीय जल आयोग ने चेतावनी दी थी कि विश्व के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश में “जलीय राजनीति, संघवाद के मूलभूत ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने पर तुली हुई है”. वास्तव में सिंधु और ब्रह्मपुत्र सहित सभी नदियों के साथ-साथ उपमहाद्वीप की सभी प्रमुख नदियाँ भी किसी न किसी स्तर पर विवादास्पद ही हैं. वस्तुतः जहाँ अनेक देशों की सीमाओं से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग अधिकाधिक चर्चा में रहते हैं, वहीं भारत की आंतरिक नदियों के

अनौपचारिक निकासी नैटवर्क के माध्यम से क्रांतिकारियों की वापसीः भारत के साक्ष्य

रुमेला सेन
आखिर क्रांतिकारी सशस्त्र गुट को छोड़कर उसी राजनैतिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कैसे लौट आते हैं, जिसे पहले वे उखाड़ फेंकने की बात करते थे? इस विषय पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है कि पुरुष और स्त्रियाँ विद्रोह क्यों करते हैं? लेकिन इस बारे में हमारी जानकारी बहुत कम है कि विद्रोह का रास्ता छोड़कर वे सामान्य जीवन में क्यों और कैसे लौट आते हैं. परंतु नेपाल से लेकर कोलंबिया तक नीति-निर्माता अभी भी