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चयनिका सक्सेना
20/04/2020

कोविड-19 ने न केवल भारत में एक जैविक आपदा को जन्म दिया है, बल्कि मौजूदा सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक असमानताओं को भी बढ़ाया है. अनगिनत लोग ऐसे भी हैं जो अपने-आपको बहुत अभागा समझ रहे हैं. इन अभागे लोगों में सबसे अधिक दयनीय लोग वे हैं जो शरणार्थी हैं और जिनका कोई वतन नहीं हैं.

टी. सुंदररामण
09/04/2020

अचानक ही सिर्फ़ छह सप्ताहों में कोविड-19 की विश्वव्यापी महामारी हम पर हावी हो गई है.

उद्दीपना गोस्वामी
16/03/2020
मैंने दिल्ली में एक दशक से अधिक समय बिताया है, यही कारण है कि भारत की राजधानी में हुई ताज़ा हिंसक घटनाओं ने मुझे मर्माहत कर दिया है, लेकिन मुझे इससे कोई हैरानी नहीं हुई। हो सकता है कि इसकी वजह यही हो कि मैं भारत के उस अशांत पूर्वोत्तर राज्य से हूँ, जहाँ हिंसा का तांडव नृत्य दैनंदिन जीवन का एक हिस्सा है। या हो सकता है कि मुझे यह एहसास इसलिए भी है कि आज जो कुछ हो रहा है, वह भारत के बीचों-बीच हो रहा है। मुझे लगता है कि भारत के सुदूर परिधि पर
दुव्वरी सुब्बाराव
02/03/2020
तीन साल पहले, भारतीय अर्थव्यवस्था की त्रैमासिक विकास दर लगभग 9 प्रतिशत हो गई थी. लेकिन अब यह दर घटकर आधी रह गई है और पिछली तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर 2019) में 4.7 प्रतिशत रह गई. अधिकतर अनुमानों के अनुसार मार्च 2020 को समाप्त होने वाले राजकोषीय वर्ष में विकास दर 5 प्रतिशत हो जाएगी और अगले वर्ष, 2020-21 में यह दर बढ़कर 6 प्रतिशत हो जाएगी. सारे देश के लिए यह गिरावट हैरान कर देने वाली थी. हाल ही में अभी तक हम शान से कहा करते थे कि हमारी
स्वामिनाथन सुब्रमणियम
17/02/2020
सभी देश यह प्रयास करते हैं कि वे अपने नागरिकों को किफ़ायती और अच्छे किस्म की स्वास्थ्य-सेवा उपलब्ध कराएँ. अगर भारत जैसे कम संसाधनों वाले देश को ये दो लक्ष्य ( किफ़ायती और अच्छी स्वास्थ्य सेवा) प्राप्त करने हैं तो उसे स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले मॉडल को नये सिरे से विकसित करना होगा. भारत के सामने दो प्रमुख वास्तविकताएँ हैं: भारी जनसंख्या और प्रति व्यक्ति