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वातावरण

भूटान में भारत का पनबिजली निवेशः पर्यावरण पर प्रभाव और सिविल सोसायटी की भूमिका

सुप्रिया रॉय चौधुरी और शशांक श्रीनिवास
भारत अन्य उदीयमान शक्तियों से साथ वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह बनाने में जुटा हुआ है और इसके लिए ज़रूरी है कि वह भारी मात्रा में बिजली की पूर्ति की प्रतिस्पर्धा में प्रभावी रूप में भाग ले. यह तभी संभव हो सकता है

अधिक और बेहतर भीः भारत के कोयले के उपयोग में अकुशलताएँ

रोहित चंद्र
UNFCCC अर्थात् जलवायु परिवर्तन संबंधी संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के पक्षकार सम्मेलन (COP) में अपने देश के कोयले के उपयोग की गहन समीक्षा लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले कुछ वर्षों में पक्षकारों के सम्मेलनों में बढ़ा-चढ़ाकर और शब्दाडंबर से पूर्ण और उम्मीद से कहीं कम नतीजे रहे हैं. ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट नहीं है कि नतीजे ज़मीनी हकीकत से कितने जुड़े होंगे. भारत के ऊर्जा-मिश्रण का निर्धारण मुख्यतः घरेलू कारणों से ही होता है, लेकिन इस प्रकार के वार्षिक बहुपक्षीय सम्मेलनों से

सार्वजनिक भागीदारी से जैव-विविधता का प्रबंधनः क्या भारत की भूमिका बेहतर हो सकती है ?

गज़ाला शहाबुद्दीन
भारत में जैव-विविधता के संरक्षण के लिए अपनाये गये और कानूनी तौर पर स्थापित संरक्षित क्षेत्र ऐतिहासिक रूप में जैव-विविधता के संरक्षण के सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन रहे हैं. संरक्षित क्षेत्रों (PAs) के अंतर्गत मुख्यतः राष्ट्रीय पार्क और वन्यजीवन अभयारण्य आते हैं, लेकिन हाल ही में सामुदायिक रिज़र्व और संरक्षण रिज़र्व को भी इनमें शामिल कर लिया गया है. इस समय, भारत भर में लगभग 703 संरक्षित क्षेत्र (PAs) हैं, जो देश के भूमि-क्षेत्र के लगभग 5 प्रतिशत इलाके में फैले हुए हैं. ज़मीन और पानी की बढ़ती हुई माँग और

भारत में इनडोर वायु प्रदूषण में कमी लाने के लिए महिलाओं का सशक्तीकरण

अविनाश किशोर

इनडोर अर्थात् घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण का सेहत पर पड़ने वाले भारी नकारात्मक दुष्परिणामों के बावजूद दुनिया के लगभग पचास प्रतिशत घरों के लोग खाना पकाने के लिए ठोस जैवपिंड का ईंधन ही इस्तेमाल करते हैं. भारत में हालात और भी खराब हैं, जहाँ 83 प्रतिशत ग्रामीण घरों के लोग और लगभग 20 प्रतिशत शहरी घरों के लोग अभी-भी खाना बनाने के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत के रूप में लकड़ी या गोबर का इस्तेमाल करते है. एक अनुमान के अनुसार परंपरागत चूल्हे में इस प्रकार की बिना प्रोसेस की हुई जैवपिंड की ऊर्जा को जलाने से लगभग आधे मिलियन लोग हर साल अकाल मृत्यु के शिकार होते हैं.

परमाणु संरक्षकों का संरक्षण

क्रिस्टोफ़र क्लैरी

सन् 1998 के परमाणु परीक्षण की पंद्रहवीं वर्षगाँठ को कुछ सप्ताह ही हुए हैं. सन् 1974 के भारत के “शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण” की चालीसवीं वर्षगाँठ को पूरा होने में साल भर से कम समय बचा है. भारत अपने परमाणु वैज्ञानिकों की उपलब्धियों पर गर्व का अनुभव करता है. अंतर्राष्ट्रीय  हुकूमत द्वारा प्रगति को धीमा करने के लिए किये गये प्रयासों को देखते हुए भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और यहाँ तक कि नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों ने एकजुट होकर परमाणु ऊर्जा की भिन्न-भिन्न प्रकार की अवसंरचनाओं को निर्मित करने और परमाणु हथियारों को बनाने की क्षमता विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किये हैं.

बदलती धाराएँ:अंतर्राज्यीय नदियाँ और संबंध

श्रीनिवास चोक्ककुला

हाल ही में जल संसाधन मंत्रालय ने सन्2012 की जल नीति के राष्ट्रीय प्रारूप से संबंधित प्रस्ताव के अनुसरण में अंतर्राज्यीय नदियों के जल संबंधी विवादों के लिए एक स्थायी अधिकरण बनाने के लिए एक कैबिनेट नोट तैयार किया है.जहाँ तक रिपोर्ट का संबंध है, विवादों के निवारण में होने वाले विलंब और बार-बार होने वाले इन विवादों के निपटारे के लिए उच्चतम न्यायालय जाने की राज्यों की प्रवृत्ति से सरकार बहुत चिंतित है. न्यायनिर्णयन के लिए स्थायी गुंजाइश रखने का लाभ तो होगा, लेकिन यह काफ़ी नहीं होगा. यह एप्रोच गलत सूचनाओं पर आधारित है.

बाँध की राजनीतिः भारत, चीन और सीमा-पार नदी

रोहन डिसूज़ा

हाल ही के वर्षों में जब भी भारत और चीन के बीच शिखर-वार्ताएँ हुई हैं, जल-विवाद का मुद्दा मुखर होकर समझौता-वार्ताओं में छाया रहा है. सबसे अधिक उलझन वाला मुद्दा रहा है, भीषण और क्रोधी स्वभाव वाली सीमा-पार की नदी, येलुज़ंगबु-ब्रह्मपुत्र-जमुना (वाईबीजे) प्रणाली, जिसका अपना पूरा जलमार्ग तीन प्रभुता-संपन्न देशों (चीन, भारत और बांगला देश) से होकर गुज़रने के बाद ही खत्म होता है.

किसने बदला गोमाँस की मेरी परंपरा को? : विनियामक परिवर्तन और गुलाबी क्रांति

रोहित दे

परंपरागत धार्मिक विश्वास और पुराने ढंग के खेती-बाड़ी के तौर-तरीकों में रचे-बसे और परिवर्तन की लहर से बेखबर भारत में अब हर बंधी-बँधाई धारणाओं की तरह गाय की छवि में भी बदलाव आ रहा है. फिर भी पिछले एक दशक में भारत की बदलती राजनैतिक अर्थव्यवस्था और विनियामक राजनीति में गाय एक संकेतक के रूप में उभर रही है. आँकड़े दर्शाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में सभी प्रकार के अन्य समन्वित माँस की कुल खपत के मुकाबले में गोमाँस की खपत कहीं अधिक बढ़ी है.

कच्चे तेल का भारत का राजा अफ्रीका में तेल के क्षेत्र में निवेश करके फँसा

ल्यूक पैटे

पिछले दिसंबर में दक्षिणी सूडान में संघर्ष शुरू हो जाने के कारण हाल ही में नवोदित देश में भारत के मल्टी-बिलियन डॉलर की तेल परियोजना बंद हो गयी. अस्थिरता के कारण भारतीय राजनयिकों ने नुक्सान से बचने की कोशिशें शुरू कर दीं, क्योंकि भारत की राष्ट्रीय तेल कंपनी की अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) के लिए आवश्यक था कि वह उस क्षेत्र से अपने कर्मचारियों को बाहर निकाले. वैश्विक तेल संसाधनों को हासिल करने में चीन को अक्सर भारत का सबसे बड़ा प्रतियोगी माना जाता है.

पाइप की राजनीतिः विश्व स्तर की ढाँचागत सुविधाएँ और शहरी विकास

लीज़ा ब्यॉर्कमैन

सन् 1991 में जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने बंबई को सिंगापुर की तरह “विश्व स्तर का शहर” बनाने की योजना का श्रीगणेश किया था, तब से बंबई (अब मुंबई) शहर की सूरत में नाटकीय परिवर्तन होता रहा है.