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मानव पूंजी

भारत में कॉपीराइट संबंधी सुधार और प्रोत्साहन-ढाँचे का स्वरूप

अनंत पद्मनाभन

कॉपीराइट संरक्षण को प्रोत्साहन तभी मिल सकता है जब इस संरक्षण के लिए कोई विशेष उपयोगितावादी औचित्य हमारे पास हो. विशिष्ट अधिकारों के साथ-साथ सार्वजनिक हित के अपवाद सहित एकाधिकार वाले इसके व्यापक ढाँचे में भारत में बौद्धिक संपदा का कानून बनाने में उपयोगितावादी की यदि इकहरी नहीं तो नियामक भूमिका तो है ही. वस्तुतः यदि कॉपीराइट रचनाकारों को मात्र सम्मानित करने और उनकी कृतियों को सम्मान दिलाने के लिए न भी हो तो भी शासन की ओर से उन्हें पुरस्कार और पारितोषिक तो दिये ही जा सकते हैं. अगर शासन चाहता है कि वे अधिक से अधिक रचनाएँ करें तो उन्हें अधिकाधिक आर्थिक प्रोत्साहन दिये जाने चाहिए.

नकदी, उम्मीदवार और चुनावी अभियान

माइकल कोलिन्स

दो माह पूर्व भारत में इतिहास की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक घटना संपन्न हुई थी. 2014 का आम चुनाव पाँच सप्ताह की अवधि में नौ चरणों में संपन्न हुआ था, जिसमें 16 वीं लोकसभा के लिए 553.8 मिलियन मतदाताओं ने वोट डाले थे. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड विजय सुर्खियों में बनी रही और चुनाव पर हुए भारी खर्च के मामले से लोगों का ध्यान हट गया. एक अनुमान के अनुसार इस चुनाव में $5 बिलियन डॉलर का खर्च आया, जिसमें से $600 मिलियन डॉलर का खर्च तो सरकारी राजकोष से ही हुआ. हाल का यह चुनाव लोकतंत्र के इतिहास में सबसे महँगा चुनाव साबित हुआ. 

नरेगाः पुनरुद्धार हो या खत्म हो ?

अभिरूप मुखोपाध्याय

क्या नरेगा पर संकट गहरा रहा है या यह मरणासन्न स्थिति में अंतिम साँसें गिन रहा है? वर्ष 2010-11 में इसका बजट 401बिलियन रुपये था, जो 2013-2014 में घटकर 330 बिलियन रुपये रह गया. हाल ही में कामगारों के लिए घोषित अधिक मज़दूरी के कारण नरेगा पर मामूली-सा असर पड़ा है. सरकारी अधिकारियों (और अनेक अर्थशास्त्रियों) को लगता है कि नरेगा में अब कामगारों की सामान्यतः रुचि नहीं रह गई है.