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विदेश नीति और सुरक्षा

भारत और दक्षिण कोरियाः आपसी सुरक्षा-हितों का आकलन

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06/11/2017
जी यन-जूङ्

हाल ही में, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ती राजनीतिक सरगर्मियों से दोनों देशों के बीच एशिया में आपसी सुरक्षा-हितों को साझा करने की एक नई शुरुआत हुई है. अभी दो महीने पहले ही, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने अपने प्रशासन के सौवें दिन पूरे होने पर विशेष समारोह का आयोजन किया था, जिसे व्यापक जनसमर्थन मिला. अब द.कोरिया के कूटनीतिक गलियारे में भारत को आमंत्रित करके वह एक साहसिक कदम उठाने जा रहे हैं. 

टोक्यो और नई दिल्ली की बढ़ती नज़दीकियों के क्या कारण हैं ?

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25/09/2017
रूपकज्योति बोरा

अगस्त 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंज़ो आबे ने अपने आरंभिक कार्यकाल के दौरान "दो सागरों के संगम” पर दिये गये अपने ऐतिहासिक भाषण में टिप्पणी की थी कि "प्रशांत और हिंद महासागर अब मिलकर स्वतंत्रता और समृद्धि के समुद्र के रूप में गतिशील हो रहे हैं.”  पिछली कालावधि के रिश्तों के विपरीत जापान और भारत के बीच अब जिस तेज़ी के साथ रिश्तों में गर्माहट बढ़ी है, वह अभूतपूर्व है.

दक्षिण एशिया में चीन के प्रतिकार के लिए “समान विचारधारा वाले” देशों की भागीदारी

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11/09/2017
कॉन्स्टेंटिनो ज़ेवियर

वर्ष 2000 के मध्य से दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभुत्व के कारण इस क्षेत्र में पाकिस्तान से लेकर म्याँमार तक और हिंद महासागर में भी भारत का परंपरागत दबदबा कुछ कम हो गया है. चूँकि बीजिंग पूरे उप महाद्वीप में इतनी भारी मात्रा में वित्तीय निवेश करता है और अपनी रणनीतिक धौंस जमाता है कि नई दिल्ली को अपने रणनीतिक ढंग से भारी क्षमताओं वाली चीनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

भारत में खुफ़िया तंत्र और विदेश-नीति निर्माण की प्रक्रिया

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28/08/2017
अविनाश पालीवाल
भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी (नई दिल्ली के अनुसार) कमांडर कुलभूषण जाधव मार्च, 2016 से पाकिस्तानी जेल में हैं और उनके मुकदमे को लेकर जनता में खासी चर्चा हो रही है. पाकिस्तान ने उन पर भारत की प्रमुख खुफ़िया एजेंसी रॉ के लिए काम करने का आरोप लगाया है और अप्रैल, 2017 में उनका कोर्ट मार्शल किया गया और पाकिस्तान में “आतंकवादी” गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त पाये जाने पर उन्हें मृत्युदंड की सज़ा दी गयी.

धीमी गति और जड़ता से भरे संबंध : अमरीकी-भारत रक्षा और सुरक्षा संबंधों का अगला कदम

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31/07/2017
जोशुआ टी.व्हाइट
राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के बीच जून माह में हुई शिखर वार्ता के बाद अमरीका और भारत दोनों देशों के नीति विशेषज्ञों ने चैन की साँस ली. आशंका के विपरीत कुछ लोगों को एक दूसरे से मुलाकात करते समय दोनों नेताओं के हाव-भाव और निर्णय भी बेहद सकारात्मक लगे. इस

बांग्लादेश-भारत संबंधः भूमि सीमा करार के लेंस के ज़रिये

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13/02/2017
तमीना एम. चौधुरी
बांग्लादेश-भारत संबंध कदाचित् उप महाद्वीप में सबसे अधिक जटिल द्विपक्षीय संबंध हैं. सन् 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद से ही यह धारणा बनी रही है कि भारत की भूमिका पाकिस्तान के विरुद्ध मात्र अपने राष्ट्र हितों को साधने की रही है. सन् 1972 में शांति और मैत्री की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद दोनों ही देश आपसी संबंधों को सुधारने का प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें

भारत-अफ़गानिस्तान “धुरी” और पाकिस्तान का सवाल

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19/12/2016
अविनाश पालिवाल
भारत-अफ़गानिस्तान के संबंधों की पूरी ताकत का प्रदर्शन 4 दिसंबर, 2016 को अमृतसर में आयोजित छठे हार्ट ऑफ़ एशिया के सम्मेलन में हुआ था. अफ़गान केंद्रित हक्कानी नैटवर्क से संबद्ध “आंतकवादियों” को और भारत केंद्रित लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद को “सुरक्षित पनाह” देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना करते हुए नई दिल्ली और काबुल ने इस मंच का इस्तेमाल इस्लामाबाद को अलग-थलग करने और नीचा दिखाने के लिए सफलतापूर्वक किया. दोनों देशों ने एयर कार्गो के लिए एक ऐसे कॉरिडोर के बारे में भी चर्चा की, जिसमें पाकिस्तान को बाईपास किया जा सके, क्योंकि अफ़गानिस्तान को उनके देश से भारतीय बाज़ारों में और भारतीय बाज़ारों से उनके देश में आवाजाही का रास्ता अभी तक खुल नहीं पाया है.

कारोबार में अल्पसंख्यकः भारत अमरीका के सप्लायर विविधता के कार्यक्रमों से क्या सीख सकता है ?

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05/12/2016
नरेन करुणाकरन

अमरीकियों के पास लगभग 28 मिलियन छोटे कारोबार हैं. इनमें से 8 मिलियन कारोबार अल्पसंख्यकों के पास हैं और अल्पसंख्यकों के इन कारोबारों से उत्पन्न 64 प्रतिशत नई नौकरियाँ ऐसी हैं, जिनकी शुरुआत 1993 और 2011 के बीच हुई थी. लगभग आधे अमरीकी कामगार इन नौकरियों पर ही लगे हुए हैं. राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की कामयाबी इन्हीं छोटे कारोबारों के कार्य-परिणामों पर ही निर्भर करती है. यह बात तो निःसंकोच मानी जा सकती है कि कई दशकों से सतत चलने वाले सप्लायर डाइवर्सिटी ईको सिस्टम में न तो कोई कटौती हो सकती है और न ही उसके विशेष दर्जे को कोई आघात पहुँच सकता है.

मुल्ला मंसूर के मारे जाने के कारण अफ़गानिस्तान में पाकिस्तान के कम होते विकल्प

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20/06/2016
अजय शुक्ला
क्या पाकिस्तान ने मुल्ला मुहम्मद मंसूर की मौत का मार्ग सिर्फ़ इसलिए ही प्रशस्त किया था, क्योंकि तालिबान के मुखिया ने काबुल में शांति-वार्ता में भाग लेने से इंकार कर दिया था? आखिरकार मंसूर की ज़िद के कारण ही इस्लामाबाद तालिबान को चतुष्कोणीय समन्वय दल (QCG) के साथ बातचीत के मंच पर लाने के अपने वायदे उत्तराधिकारी मुल्ला हैब्तुल्ला अखुंदज़ा भी उसकी तरह लड़ाई के मैदान में पाई गई कामयाबी को राजनीतिक समझौते में इस तरह से खोने के लिए तैयार नहीं है कि अधिकांश सत्ता काबुल की “कठपुतली सरकार” को मिल जाए? तालिबान की

भारत के नये बिट मॉडल की उपलब्धियाँ और कमियाँ

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23/05/2016
सुमति चंद्रशेखरन और स्मृति परशीरा

दिसंबर, 2015 में भारत सरकार ने अपने नये मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को सार्वजनिक कर दिया. यह व्यक्तिगत स्तर पर किये गये समझौते के करार का एक टैम्पलेट है, जिसके माध्यम से किसी एक देश की किसी फ़र्म द्वारा दूसरे देश की फ़र्म में किये गये निजी निवेश को शासित किया जाता है.