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अर्थव्यवस्था

पर्यावरण के लिए अनुकूल रोड नैटवर्क बनाने के लिए सुनियोजित योजना

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10/04/2017
शशांक श्रीनिवासन
भारत को ज़रूरत है सड़कों की. देश भर में माल-असबाब और लोगों के निर्बाध आवागमन के लिए हमारे लिए रोड नैटवर्क बेहद आवश्यक है और इसकी मदद से ग्रामीण इलाके भी पूरे देश से जुड़ जाएँगे. रेल मार्ग और भारत की सड़कें सारे देश में एकता स्थापित करती हैं, लेकिन सवाल यह है कि भारत में कितनी सड़कें होनी चाहिए? यह तो स्पष्ट हो ही जाना चाहिए कि देश के अधिक से अधिक कितने इलाके में रोड नैटवर्क होना चाहिए. अगर हम सड़क पर आने वाली भारी लागत को थोड़ी देर के लिए छोड़ भी दें तो भी अवसर की लागत पर विचार तो होना ही चाहिए; यह भी स्पष्ट है कि सड़क-निर्माण के लिए आबंटित ज़मीन का उपयोग किसी और काम के लिए नहीं किया जा सकता. साथ ही कुछ और बातों पर भी

विमुद्रीकरणः साफ़ तौर पर विध्वंस की राजनीति

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30/01/2017
अक्षय मंगला
8 नवंबर, 2016 को टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी घोषणा की, जिससे सभी स्तब्ध रह गए. इसी दिन मध्यरात्रि से ₹500 और ₹1,000 के मूल्य-वर्ग के नोट अवैध हो जाएँगे. इस समय जो नकदी प्रचलन में है, वह एक अनुमान के अनुसार कुल नकदी का लगभग 86 प्रतिशत (₹15 ट्रिलियन) है. ऐसे अवैध नोट रखने वालों से कहा गया है कि वे 30 दिसंबर, 2016 तक बैंक में विमुद्रीकृत नोटों का विनिमय कर लें या उन्हें बैंक में जमा करा दें. इस विध्वंसकारी नीति को अपनाने का घोषित कारण यही बताया गया है कि इससे “काले धन” पर रोक लगायी जा सकेगी. “काले धन” का मतलब है, ऐसा धन जो अघोषित स्रोतों से अर्जित किया गया हो. साथ ही एक घोषित कारण यह भी बताया गया कि इससे आपराधिक और आतंकवादी

कारोबार में अल्पसंख्यकः भारत अमरीका के सप्लायर विविधता के कार्यक्रमों से क्या सीख सकता है ?

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05/12/2016
नरेन करुणाकरन

अमरीकियों के पास लगभग 28 मिलियन छोटे कारोबार हैं. इनमें से 8 मिलियन कारोबार अल्पसंख्यकों के पास हैं और अल्पसंख्यकों के इन कारोबारों से उत्पन्न 64 प्रतिशत नई नौकरियाँ ऐसी हैं, जिनकी शुरुआत 1993 और 2011 के बीच हुई थी. लगभग आधे अमरीकी कामगार इन नौकरियों पर ही लगे हुए हैं. राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की कामयाबी इन्हीं छोटे कारोबारों के कार्य-परिणामों पर ही निर्भर करती है. यह बात तो निःसंकोच मानी जा सकती है कि कई दशकों से सतत चलने वाले सप्लायर डाइवर्सिटी ईको सिस्टम में न तो कोई कटौती हो सकती है और न ही उसके विशेष दर्जे को कोई आघात पहुँच सकता है.

राष्ट्रीय कृषि मंडी (NAM) क्या है ?

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05/07/2016
मेखला कृष्णमूर्ति

इसी साल के आरंभ में अप्रैल के मध्य में प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय कृषि मंडी (NAM) का उद्घाटन किया था, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों  (e-nam.gov.in) के लिए एकीकृत राष्ट्रीय मंडी का निर्माण करना था, ताकि मौजूदा कृषि उपज बाज़ार समिति (APMC) की मंडियों के नैटवर्क के लिए एकीकृत अखिल भारतीय इलैक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल को डिज़ाइन किया जा सके. सबसे पहले राष्ट्रीय कृषि मंडी (NAM) का प्रस्ताव 2014-15 के केंद्रीय बजट में किया गया था. इस समय यह अपने प्रायोगिक चरण में है और इसके अंतर्गत 8 राज्यों में फैली 21 मंडियाँ और 11 कृषि उत्पादन आते हैं.

काम करने के अधिकार को सबल बनाने के लिएः भारत का दसवर्षीय राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम

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29/02/2016
रॉब जेकिन्स
फ़रवरी,2016 में भारत के राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम को लागू हुए दस साल पूरे हो गए. नरेगा क्रांतिकारी होने के साथ-साथ सीमित भी है. जहाँ इससे एक ओर प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सार्वजनिक निर्माण की परियोजनाओं पर साल में सौ दिन का रोज़गार मिलता है, वहीं दूसरी ओर श्रम भी बहुत ज़्यादा करना पड़ता है और मज़दूरी भी बहुत कम

सामाजिक पदक्रम में हैसियत, गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य और देश का विकास

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05/10/2015
डियाने कॉफ़े
स्वस्थ माताएँ स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं और ये बच्चे ही बड़े होकर उपयोगी काम करते हैं| इसके विपरीत जो महिलाएँ गर्भावस्था की शुरुआत में ही बहुत दुबली-पतली रहती हैं और गर्भावस्था के दौरान भी जिनका वजन जितना बढ़ना चाहिए उतना नहीं बढ़ता, उनके नवजात बच्चों का वजन भी कम रहने की सम्भावना बनी रहती है| जन्म के समय बच्चों का कम वजन का होना नवजात बच्चों की मृत्यु, जो कि जन्म के एक महीने के अन्दर होती है, की एक मुख्या वजह है| नवजात शिशु मृत्यु-दर भारत में कुल शिशु मृत्यु दर का 70

भारत आईसीटी के वैश्विक खेल में

ऐन्ड्रू बी. कैनेडी

यदि वैश्वीकरण एक खेल है तो लगता है कि भारत इसके विजेताओं में से एक विजेता हो सकता है.  पिछले दशक में भारत के आर्थिक विकास की दर का रिकॉर्ड बहुत शानदार रहा है और इसने तेज़ी से आगे बढ़ते हुए हाई टैक सैक्टर में प्रवेश पा लिया है. यह संक्रमण जितना आईसीटी (सूचना व संचार प्रौद्योगिकी) में स्पष्ट दिखायी देता है, उतना किसी और सैक्टर में दिखायी नहीं देता. जहाँ चीन ने आईसीटी हार्डवेयर के क्षेत्र में अपना मुकाम हासिल किया है, वहीं भारत ने सॉफ़्टवेयर के क्षेत्र में अपनी शक्ति का लोहा मनवा लिया है.

भारत में बदला और एकल स्टॉक के भावी सौदों की कौतूहल-भरी लोकप्रियता

11/03/2013
नील मैत्रा

सन् 1993 में भारतीय पूँजी बाज़ार के इतिहास के सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफ़ाश होने के कुछ समय के बाद ही भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बदले के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी. बदला तंत्र ऐसा है जिसमें व्यापारी अपना कारोबार बिना किसी करार के भी कर सकते हैं और  अंतर्राष्ट्रीय वित्त आयोग और आर्थर ऐंडरसन की तत्कालीन ख्याति-प्राप्त फ़र्म जैसे विचित्र स्रोतों से शेयर या पैसा उधार लेने पर इसकी काफ़ी आलोचना हो चुकी थी.

भारत में बाँटने वाली राजनीति और गुप्त मतदानः किसका क्या परिणाम होगा?

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13/01/2014
मार्क श्नाइडर

क्या राजनैतिक दलों और उनके स्थानीय एजेंटों की पहुँच सरकारी सेवाओं और सरकारी कल्याण योजनाओं से मिलने वाले लाभ तक हो पाती है और क्या वे जान पाते हैं कि मतदाता कैसे वोट डालते हैं और किसको वोट डाल सकते हैं ? यह राजनैतिक रणनीति, जिसे सामाजिक वैज्ञानिक ग्राहकवाद कहते हैं उन स्थानीय नेताओं पर किये गये भारी निवेश पर निर्भर करती है जो मतदाताओं के बारे में यह जानकारी जुटाते हैं कि दल विशेष के प्रति उनकी पसंद क्या है, उनके वोटों के और विकल्प क्या हो सकते हैं, उनके इरादे क्या हैं और साथ ही यह भी कि चुनाव के दौरान वे अपने दल के पक्ष में मतदाताओं को रिझाने के लिए कौन-से लोक-लुभावने काम कर सकते हैं?

कच्चे तेल का भारत का राजा अफ्रीका में तेल के क्षेत्र में निवेश करके फँसा

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24/03/2014
ल्यूक पैटे

पिछले दिसंबर में दक्षिणी सूडान में संघर्ष शुरू हो जाने के कारण हाल ही में नवोदित देश में भारत के मल्टी-बिलियन डॉलर की तेल परियोजना बंद हो गयी. अस्थिरता के कारण भारतीय राजनयिकों ने नुक्सान से बचने की कोशिशें शुरू कर दीं, क्योंकि भारत की राष्ट्रीय तेल कंपनी की अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) के लिए आवश्यक था कि वह उस क्षेत्र से अपने कर्मचारियों को बाहर निकाले. वैश्विक तेल संसाधनों को हासिल करने में चीन को अक्सर भारत का सबसे बड़ा प्रतियोगी माना जाता है.