Penn Calendar Penn A-Z School of Arts and Sciences University of Pennsylvania
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संजय चक्रवर्ती, एस. चंद्रशेखर और कार्तिकेय नारपराजु
01/01/2018

समावेशी विकास या “गरीबोन्मुखी” विकास भारत के विकास संबंधी विमर्श का एक महत्वपूर्ण विचारबिंदु बन गया है. इसे व्यापक समर्थन मिला है, क्योंकि इस विकास में दो सबसे महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं: प्रगतिवादी (या अधिक समतावादी) वितरण सहित आमदनी में वृद्धि. इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले बीसवीं सदी के आरंभ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यूपीए-1 सरकार के कार्यकाल में किया गया था. उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में एनडीए सरकार ने इसे आगे बढ़ाया, लेकिन क्या ‘समावेशी विकास’ ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे से कहीं आगे की बात है?

योगेश जोशी
18/12/2017
नवंबर के आरंभ में एक रूसी समाचार वैबसाइट ने दावा किया था कि भारतीय नौसेना ने अमरीका की तकनीकी टीम को सन् 2012 में भारत को पट्टे पर दी गई एक रूसी अकूला-क्लास की परमाणु पनडुब्बी के निरीक्षण की अनुमति दी थी. हालाँकि यह रिपोर्ट बाद में झूठी पाई गई, फिर भी रणनीतिक हलकों में इससे कई सवाल पैदा हो गए. इसके दो कारण थे. इसका पहला कारण तो यही था कि इस दावे के कारण परमाणु पनडुब्बी के मामले में भारत-रूसी सहयोग की बात
गौतम मेहता
04/12/2017
2 जुलाई, 2015 को नई दिल्ली में एक असाधारण इफ़्तार पार्टी हुई, जिसने मीडिया का ध्यान आकर्षित किया. भारत के राजनेता रमज़ान के मुबारक महीने के दौरान रोज़ा तोड़ने के लिए मुस्लिम भाइयों के लिए इफ़्तार पार्टियों का नियमित रूप में आयोजन करते रहे हैं, लेकिन 2014 में प्रधान मंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने न तो इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया और न ही किसी इफ़्तार पार्टी में भाग लिया. यह इफ़्तार पार्टी इसलिए अनूठी थी, क्योंकि इसका
हेमा स्वामिनाथन
20/11/2017
भारत में कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है। ग्रामीण परिवर्तन की मौजूदा स्थिति के कारण ही कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका उजागर हो पाई है। सामान्यतः, इस विषय पर चर्चा बहुत ही स्वभाविक प्रवृत्तियों पर ही केंद्रित रहती है; जैसे, स्व-नियोजित रूप में कृषि-क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं का अनुपात, सहायता-राशि का भुगतान न होना या श्रमिकों को मज़दूरी न मिलना। जो मुद्दा उपेक्षित रह जाता है, वह भी महिलाओं की भूमिकाओं में महत्वपूर्ण और दिलचस्प बदलाव
जी यन-जूङ्
06/11/2017

हाल ही में, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ती राजनीतिक सरगर्मियों से दोनों देशों के बीच एशिया में आपसी सुरक्षा-हितों को साझा करने की एक नई शुरुआत हुई है. अभी दो महीने पहले ही, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने अपने प्रशासन के सौवें दिन पूरे होने पर विशेष समारोह का आयोजन किया था, जिसे व्यापक जनसमर्थन मिला. अब द.कोरिया के कूटनीतिक गलियारे में भारत को आमंत्रित करके वह एक साहसिक कदम उठाने जा रहे हैं. 

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माधव खोसला व अनंत पद्मनाभन
23/10/2017
निजता या प्राइवेसी के संबंध में भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल ही में निजता के अधिकार की पुष्टि करते हुए जो निर्णय (न्यायमूर्ति पुत्तास्वामी बनाम भारतीय संघ) दिया गया है, उसके बाद देश के विवादास्पद बायोमैट्रिक प्रोग्राम ‘आधार’ के साथ सरकार ने पहचान के विभिन्न प्रकार के नंबरों और कल्याणकारी योजनाओं को जोड़ने के
एम. आर. माधवन
09/10/2017
लोकतंत्र निर्वाचित संस्थाओं के संचालन से ही विधिमान्य बनता है. संसद अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण कार्यों को संपन्न करते हुए भारत के लोकतंत्र में अपनी केंद्रीय भूमिका का निर्वाह करता है. प्रधान मंत्री (और मंत्रिमंडल) को हर समय प्रत्यक्ष रूप में निर्वाचित लोकसभा के बहुमत का समर्थन अपेक्षित होता है. लोकसभा और परोक्ष रूप में निर्वाचित राज्यसभा अपने प्रश्नकाल में पूछे गए सवालों और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर की जाने वाली बहस और प्रस्तावों जैसी अनेक प्रक्रियाओँ के द्वारा
रूपकज्योति बोरा
25/09/2017

अगस्त 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंज़ो आबे ने अपने आरंभिक कार्यकाल के दौरान "दो सागरों के संगम” पर दिये गये अपने ऐतिहासिक भाषण में टिप्पणी की थी कि "प्रशांत और हिंद महासागर अब मिलकर स्वतंत्रता और समृद्धि के समुद्र के रूप में गतिशील हो रहे हैं.”  पिछली कालावधि के रिश्तों के विपरीत जापान और भारत के बीच अब जिस तेज़ी के साथ रिश्तों में गर्माहट बढ़ी है, वह अभूतपूर्व है.

कॉन्स्टेंटिनो ज़ेवियर
11/09/2017

वर्ष 2000 के मध्य से दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभुत्व के कारण इस क्षेत्र में पाकिस्तान से लेकर म्याँमार तक और हिंद महासागर में भी भारत का परंपरागत दबदबा कुछ कम हो गया है. चूँकि बीजिंग पूरे उप महाद्वीप में इतनी भारी मात्रा में वित्तीय निवेश करता है और अपनी रणनीतिक धौंस जमाता है कि नई दिल्ली को अपने रणनीतिक ढंग से भारी क्षमताओं वाली चीनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

अविनाश पालीवाल
28/08/2017
भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी (नई दिल्ली के अनुसार) कमांडर कुलभूषण जाधव मार्च, 2016 से पाकिस्तानी जेल में हैं और उनके मुकदमे को लेकर जनता में खासी चर्चा हो रही है. पाकिस्तान ने उन पर भारत की प्रमुख खुफ़िया एजेंसी रॉ के लिए काम करने का आरोप लगाया है और अप्रैल, 2017 में उनका कोर्ट मार्शल किया गया और पाकिस्तान में “आतंकवादी” गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त पाये जाने पर उन्हें मृत्युदंड की सज़ा दी गयी.