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विज्ञान और प्रौद्योगिकी

बिजली (पावर ) के बदलते ढाँचे

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21/10/2013
रोहित चंद्रा

एक सप्ताह पहले ही फ़ैलिन नामक चक्रवात ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश से गुज़रते हुए तबाही मचा दी थी.   यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 200  कि.मी.की रफ़्तार से चलने वाली हवाओं ने समुद्रतटीय इलाकों में बिजली के पारेषण की ढाँचागत सुविधाओं को काफ़ी प्रभावित किया है. बिजली का वितरण करने वाले हज़ारों खंभों और हज़ारों किलोमीटर तक उनकी तारों के उखड़ जाने के कारण विशेष तौर पर ओडिसा के कुछ ज़िले बिजली की भारी कमी से अभी भी जूझ रहे हैं. परंतु फ़ैलिन के दौरान जिस संभावित तबाही से हम बच गये हैं, वह है बड़े स्तर पर ग्रिड फ़ेल होने की तबाही.

क्या एमओओसी भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार में मदद कर सकते हैं ?

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30/12/2013
गेल क्रिस्टेंसन और ब्रैंडन ऐल्कर्न

भारत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारी चुनौतियों का सामना कर रहा है. सन् 2007 में प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत के लगभग आधे ज़िलों में उच्च शिक्षा में नामांकन “बहुत ही कम” है और दो तिहाई भारतीय विश्वविद्यालय और 90 प्रतिशत भारतीय कॉलेज गुणवत्ता की दृष्टि से औसत से भी बहुत नीचे हैं. इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है कि शिक्षा की माँगों को पूरा करने में शासन की विफलता के कारण ही भारत के संभ्रांत और मध्यम वर्ग के विद्यार्थी भारत में और भारत के बाहर भी सरकारी संस्थाओं को छोड़कर निजी संस्थाओं की ओर रुख करने लगे हैं.

पाइप की राजनीतिः विश्व स्तर की ढाँचागत सुविधाएँ और शहरी विकास

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21/04/2014
लीज़ा ब्यॉर्कमैन

सन् 1991 में जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने बंबई को सिंगापुर की तरह “विश्व स्तर का शहर” बनाने की योजना का श्रीगणेश किया था, तब से बंबई (अब मुंबई) शहर की सूरत में नाटकीय परिवर्तन होता रहा है.

मध्य शक्तियों की अनुरूपताः भारत,फ्रांस और परमाणु टैक्नोलॉजी

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29/06/2015
जयिता सरकार
अप्रैल, 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योरोपीय देशों में सबसे पहले फ्रांस का ही दौरा किया था. इससे पेरिस के साथ नई दिल्ली के बढ़ते रिश्तों का संकेत मिलता है. भारत ने रक्षा की खरीद के आधार को भी व्यापक बनाने का प्रयास किया और साथ ही शीत युद्ध की अधिकांश अवधि के दौरान समान बिंदुओं पर दोनों देशों की समान विचारधारा पर भी ज़ोर दिया. फ्रांस धीरे-धीरे सभी तीनों रणनीतिक (अर्थात् रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा) क्षेत्रों में भारत को दुर्जेय टैक्नोलॉजी की सप्लाई करने वाले देश के रूप में उभरकर सामने आया. यद्यपि पेरिस में उपमहाद्वीप में अमरीका के प्रभाव को कम करने या उसका स्थान लेने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, फिर भी नई