Penn Calendar Penn A-Z School of Arts and Sciences University of Pennsylvania

संक्रमण के दौर में भारत (India in Transition)

नीलांजन सरकार
02/01/2017
30 दिसंबर, 2016 को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने अपने ही बेटे अखिलेश यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया. सिर्फ़ एक दिन के बाद ही निष्कासन आदेश को वापस ले लिया गया और अखिलेश यादव को फिर से अपने पद पर बहाल कर दिया गया. उत्तर प्रदेश (यूपी) के करिश्माई नेता अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी पर अपनी पकड़ मज़बूत करना शुरू कर दिया था. यही बात कुछ हद तक पार्टी के बुजुर्ग नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों को चुभ गई. चुनाव आयोग यूपी में चुनाव की तारीखों की घोषणा करने वाला है. समाजवादी पार्टी के पास अपनी पार्टी में गुटबाज़ी को खत्म करने के लिए बहुत कम समय बाकी है. इसलिए यह समय उनके लिए बहुत कीमती है. किसी को नहीं मालूम कि कल क्या होगा ? स्वाभाविक है कि दैनिक समाचार
अविनाश पालिवाल
19/12/2016
भारत-अफ़गानिस्तान के संबंधों की पूरी ताकत का प्रदर्शन 4 दिसंबर, 2016 को अमृतसर में आयोजित छठे हार्ट ऑफ़ एशिया के सम्मेलन में हुआ था. अफ़गान केंद्रित हक्कानी नैटवर्क से संबद्ध “आंतकवादियों” को और भारत केंद्रित लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद को “सुरक्षित पनाह” देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना करते हुए नई दिल्ली और काबुल ने इस मंच का इस्तेमाल इस्लामाबाद को अलग-थलग करने और नीचा दिखाने के लिए सफलतापूर्वक किया. दोनों देशों ने एयर कार्गो के लिए एक ऐसे कॉरिडोर के बारे में भी चर्चा की, जिसमें पाकिस्तान को बाईपास किया जा सके, क्योंकि अफ़गानिस्तान को उनके देश से भारतीय बाज़ारों में और भारतीय बाज़ारों से उनके देश में आवाजाही का रास्ता अभी तक खुल नहीं पाया है.
नरेन करुणाकरन
05/12/2016

अमरीकियों के पास लगभग 28 मिलियन छोटे कारोबार हैं. इनमें से 8 मिलियन कारोबार अल्पसंख्यकों के पास हैं और अल्पसंख्यकों के इन कारोबारों से उत्पन्न 64 प्रतिशत नई नौकरियाँ ऐसी हैं, जिनकी शुरुआत 1993 और 2011 के बीच हुई थी. लगभग आधे अमरीकी कामगार इन नौकरियों पर ही लगे हुए हैं. राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की कामयाबी इन्हीं छोटे कारोबारों के कार्य-परिणामों पर ही निर्भर करती है. यह बात तो निःसंकोच मानी जा सकती है कि कई दशकों से सतत चलने वाले सप्लायर डाइवर्सिटी ईको सिस्टम में न तो कोई कटौती हो सकती है और न ही उसके विशेष दर्जे को कोई आघात पहुँच सकता है.

बिलाल बलोच
21/11/2016
2011 के आरंभ से लेकर 2012 के अंत तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की यूपीए की गठबंधन सरकार ने भारत के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के रूप में सबसे बड़ी नागरिक चुनौती का सामना किया था. यह आंदोलन वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से जुड़े उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार के घोटालों के लगातार बढ़ने के कारण हुआ था. सन् 2009 में चुनाव में दुबारा सफलता मिलने के बाद यूपीए ने अपने-आपको विश्वसनीयता के संकट और भ्रष्टाचार के बीच फँसा हुआ पाया. भ्रष्टाचार-विरोधी राष्ट्रव्यापी आंदोलनों ने विश्व भर के विकासशील लोकतांत्रिक देशों में 2013 की ग्रीष्म ऋतु की चिलचिलाती धूप में नागरिकों के आक्रोश को स्वर प्रदान किया. टर्की जैसे कुछ लोकतांत्रिक देशों ने इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप
स्वप्ना कोना नायुडु
07/11/2016
इसी सप्ताह स्वेज नहर के संकट को साठ साल पूरे हो गए हैं. सामान्य रूप में संबंधित क्षेत्र के प्रति और अरब राष्ट्रवाद के उदय के प्रति भारत के दृष्टिकोण की दृष्टि से यह घटना बहुत महत्वपूर्ण है.शुरू-शुरू में तो भारत इस संकट के मूल कारणों से जुड़ी गतिविधियों के प्रति पूरी तरह से अनजान बना रहा, लेकिन जब भारत ने इस समस्या से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से और इस संकट से जुड़े सभी पक्षों के साथ सीधे राजनयिक चर्चा शुरू की तो ऐसा लगने लगा कि हमें इस अनुभव से बहुत-से पाठ सीखने की आवश्यकता है. इस संकट का आरंभ तब हुआ जब इज़राइल, ब्रिटेन और फ्रांस तीनों ने मिलकर 29 अक्तूबर, 1956 को मिस्र पर हमला कर दिया. हालाँकि यह संकट केवल दस दिनों तक रहा, लेकिन भारत के लिए यह गहरी चिंता का सबब बना रहा.
,
ऐडम ऑएरबैक व तारिक़ थैचिल
24/10/2016
भारत की झुग्गी-झोपड़ियों के अनौपचारिक नेताओं से संबंधित इस द्विभागीय श्रृंखला के भाग एक में हमने चर्चा की थी कि किस प्रकार झुग्गी-झोपड़ियों के निवासी अपनी बस्ती के नेता बन जाते हैं और वे किस प्रकार की गतिविधियों में संलग्न रहते हैं. इस अंक में हमने उन्हीं बस्तियों की झुग्गी-झोपड़ियों के 629 वास्तविक नेताओं के नमूनों के आधार पर 2016 के ग्रीष्म में आयोजित अपने दूसरे सर्वेक्षण के निष्कर्ष निकाले हैं. व्यवस्थित रूप में और बहुत बड़े स्तर की बात तो छोड़ दें, झुग्गी-
,
ऐडम ऑएरबैक व तारिक़ थैचिल
10/10/2016
शहरों में भूसांख्यिकीय परिवर्तन के साथ-साथ शासन और विकास की भारी चुनौतियाँ भी सामने आती रही हैं. इनमें सबसे गंभीर चुनौती तो यही है कि अंधाधुंध निर्माण-कार्यों, भारी गरीबी, भूमि-अधिकारों की असुरक्षा और बुनियादी सार्वजनिक सुविधाओं की कमी के कारण झुग्गी-झोपड़ी की बस्तियों का तेज़ी से विस्तार होने लगा है. भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 65 मिलियन लोग देश-भर में फैली शहरी झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं. ये भारी
पौलोमी चक्रबर्ती
26/09/2016
पिछले दशक में शहरी मध्यम वर्ग की सक्रियता में निरंतर वृद्धि होती रही है. भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध ऐतिहासिक आंदोलन इसका जीवंत उदाहरण है. इसी आंदोलन से आम आदमी पार्टी (‘आप’ पार्टी ) का जन्म हुआ था. इसलिए इसे भारत की पहली श्रेणी-आधारित महत्वपूर्ण शहरी राजनैतिक पार्टी माना जा सकता है. हाल ही के इतिहास पर अगर हम नज़र दौड़ाएँ तो पाएँगे कि 2014 के आम चुनाव में बड़े शहरों के अलावा अन्य शहरों में भी मध्यम वर्ग का मतदान पहली बार गरीब वर्ग से कहीं अधिक हुआ था.
राधिका खोसला
12/09/2016
ऊर्जा भारत की विकास योजनाओं का केंद्रबिंदु है. यही कारण है कि अधिकांश मामलों में कोयले, गैस, परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा आदि के उत्पादन और उपलब्धता में वृद्धि हुई है. ऊर्जा की वर्तमान योजनाओं के प्रमुख बिंदुओं में इस प्रवृत्ति की झलक मिलती हैः इसमें कोयले (2020 तक 1.5 बिलियन टन के घरेलू उत्पादन के लक्ष्य के साथ) पर विशेष ध्यान दिया गया है और नवीकरणीय ऊर्जा में वृद्धि हुई है (2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन की आकांक्षा के साथ), परंतु सप्लाई के प्रति उन्मुख समाधान के ऊर्जा नियोजन की यह दृष्टि ऊर्जा की लंबे समय से चली आ रही
प्रकाश सिंह
29/08/2016
भारतीय लड़कियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. गर्भ में आते ही लड़कों के मुकाबले उनके जन्म लेने की संभावनाएँ भी बहुत कम हो जाती हैं. “खोई हुई लड़कियों” की उपस्थिति अल्ट्रासाउंड टैक्नोलॉजी की पहुँच की ज़द में आ जाती है. साथ ही लड़कियों को स्तनपान भी बहुत कम समय के लिए कराया जाता है और उन पर शिशुपालन संबंधी निवेश भी बहुत कम होता है. उम्र के साथ बढ़ते हुए लड़कों के मुकाबले उन्हें शिक्षा के अवसर भी कम ही मिलते हैं. सूखे या युद्ध के समय भारी आर्थिक आघात के बाद तो इसका दुष्प्रभाव और भी भयानक